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One Rank One Pension Yojana: 33 लाख लोगों को वन रैंक-वन पेंशन योजना का लाभ.

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One Rank One Pension Yojana: राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी ने बुधवार को जारी बयान में कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सत्ता में आते ही सेना के लिए वन रैंक-वन पेंशन योजना One Rank One Pension Yojana लागू की, जिससे लगभग 33 लाख पूर्व सैनिकों को लाभ हुआ।

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने सरकार के फैसले को सही ठहराया और इसके विरुद्ध दायर याचिका खारिज कर दी। कांग्रेस ने लगातार सत्ता में रहने के बावजूद वन रैंक-वन पेंशन योजना One Rank One Pension Yojana लागू नहीं की थी, इसलिए राहुल गांधी को सैनिकों के सम्मान और पेंशन पर बोलने का कोई हक नहीं है।

यही नहीं, एनडीए सरकार पूर्व सैनिकों को पेंशन देने के लिए एक लाख 28 हजार करोड़ रुपये खर्च करती है। यह राशि कुल रक्षा बजट का पांचवां हिस्सा है। इससे 32 लाख 90 हजार पूर्व सैनिकों को वन रैंक-वन पेंशन One Rank One Pension Yojana का लाभ मिलता है। तकनीकी कारणों से कुछ हजार सैनिकों को अप्रैल माह की पेंशन One Rank One Pension Yojana नहीं मिल पाई, उनके खाते में जल्द ही पेंशन राशि डाली जाएगी।

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क्या था आरोप: One Rank One Pension Yojana

याचिकाकर्ता भारतीय भूतपूर्व सैनिक आंदोलन (आईईएसएम) ने 7 नवंबर 2015 के OROP नीति के फैसले को चुनौती दी थी. इसमें उन्होंने दलील दी थी कि यह फैसला मनमाना और दुर्भावनापूर्ण है क्योंकि यह वर्ग के भीतर वर्ग बनाता है और प्रभावी रूप से एक रैंक को अलग-अलग पेंशन देता है.

 

केंद्र सरकार से पूछे थे ये सवाल: One Rank One Pension Yojana

  • – One Rank One Pension Yojana कैसे लागू किया जा रहा है?
  • – One Rank One Pension Yojana से कितने लोगों को लाभ हुआ है?

 

क्या है मामला? One Rank One Pension Yojana

केंद्र सरकार ने 7 नवंबर 2015 को वन रैंक वन पेंशन’ (One Rank One Pension Yojana) योजना की अधिसूचना जारी की थी. इसमें कहा गया था कि योजना 1 जुलाई, 2014 से प्रभावी मानी जाएगी. इंडियन एक्स-सर्विसमैन मूवमेंट ने सुप्रीम कोर्ट में सेवानिवृत्त सैन्य कर्मियों की 5 साल में एक बार पेंशन की समीक्षा करने की सरकार की नीति को चुनौती दी है. वहीं केंद्र ने दायर हलफनामे में 2014 में संसद में वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बयान पर विसंगति का आरोप लगाया है. केंद्र ने कहा कि चिदंबरम का 17 फरवरी 2014 का बयान तत्कालीन केंद्रीय कैबिनेट की सिफारिश के बिना दिया गया था. दूसरी ओर कैबिनेट सचिवालय ने 7 नवंबर, 2015 को भारत सरकार (कारोबार नियमावली) 1961 के नियम 12 के तहत प्रधानमंत्री की मंजूरी से अवगत कराया है.


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