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Property News : आपके के लिए राहत की खबर ! अब घर खरीदने पर कम लगेगा GST चार्ज, जानिए कितना होगा बचत.

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Property News : हाईकोर्ट ने अपने ताजा फैसले में कहा कि अगर जमीन की कीमत पता है तो उस बिल्डिंग पर कंस्ट्रक्शन करने के दौरान जीएसटी का कैलकुलेशन लैंड की उचित कीमत घटाकर होनी चाहिए. वर्तमान में फ्लैट की एक-तिहाई कीमत की कटौती के बाद उस पर टैक्स लगाया जाता है.

 

Property News : होमबायर्स के लिए बड़ी राहत भरी खबर है. गुजरात हाईकोर्ट (Gujarat High Court) ने हाल ही में एक मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग (Under-construction flats/units) पर गुड्स एंड सर्विस टैक्स लगाने से पहले जमीन की एक्चुअल कीमत का डिडक्शन जरूरी है. इससे होमबायर्स (Homebuyers) पर टैक्स का बोझ कम होगा. फिलहाल निर्माणाधीन फ्लैटों एवं आवासीय इकाइयों की बिक्री पर जीएसटी लगाए जाते समय टैक्स का कैलकुलेशन फ्लैट या यूनिट (Including value of underlying land) के पूरे मूल्य पर की जाती है. फ्लैट की एक-तिहाई कीमत की कटौती के बाद उस पर टैक्स लगाया जाता है. इस प्रक्रिया में जमीन की असली कीमत का असर नहीं होता है.

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वर्तमान नियम के मुताबिक, फ्लैट की कीमत का एक तिहाई जमीन की कीमत मानी जाती है. इसलिए टोटल वैल्यु से एक तिहाई डिडक्शन किया जाता है. बता दें कि अपने देश में जमीन पर किसी तरह का टैक्स नहीं लगता है. हालांकि इस प्रक्रिया में जमीन की असली कीमत का असर नहीं होता है.

 

शहरी क्षेत्र में जमीन की कीमत ज्यादा :

एक्सपर्ट्स ने कहा कि शहरी क्षेत्र या महानगरों में भूमि का वास्तविक मूल्य फ्लैट के एक तिहाई-मूल्य से बहुत अधिक है. एक-तिहाई कटौती का आवेदन अपनी प्रकृति में मनमाना है क्योंकि यह जमीन के क्षेत्र, आकार और स्थान को ध्यान में नहीं रखता है. एन. ए. शाह एसोसिएट्स के साझेदार नरेश सेठ ने कहा, इस व्यवस्था में परोक्ष रूप से भूमि पर कर लग रहा है जबकि जमीन पर जीएसटी लगाना केंद्र सरकार की विधायी क्षमता से परे है. गुजरात उच्च न्यायालय का यह फैसला वहां पूरी तरह लागू होगा जहां बिक्री समझौते में भूमि और निर्माण सेवाओं की कीमत का स्पष्ट जिक्र किया गया है. यह तर्कपूर्ण और निष्पक्ष निर्णय है. यदि इसका पालन किया जाता है तो निर्माणाधीन फ्लैटों को खरीदने वाले व्यक्तियों पर कर के बोझ में काफी कमी आएगी.

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जमीन की कीमत पता होना जरूरी :

गुजरात उच्च न्यायालय ने मुंजाल मनीषभाई भट्ट बनाम भारत संघ के मामले में सुनाए गए अपने फैसले में फ्लैट खरीद के समय भूमि की एक-तिहाई कीमत की कटौती को भी शामिल किया है. इससे खरीदी जाने वाली संपत्ति पर लगने वाला जीएसटी कम हो जाएगा. अदालत ने अपने फैसले में कहा है कि भूमि की एक-तिहाई कीमत की अनिवार्य कटौती उन मामलों में नहीं लागू होती है जहां जमीन की कीमत साफ-साफ पता लगाई जा सकती है.

 

रिफंड का दावा किया जा सकता है :

एथेना लॉ एसोसिएट्स के भागीदार पवन अरोड़ा ने कहा कि फ्लैट खरीदार जो पहले से ही मानक एक-तिहाई कटौती के कारण अतिरिक्त जीएसटी का बोझ झेल चुके हैं, वे डेवलपर के अधिकार क्षेत्र वाले जीएसटी प्राधिकरण के साथ रिफंड का दावा दायर कर सकते हैं. न्यायालय में इस मामले की पैरवी करने वाले अधिवक्ता अविनाश पोद्दार ने उम्मीद जताई कि अब सरकार इस कर प्रणाली में पहले की तरह फिर से मूल्यांकन नियम लेकर आएगी.

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जहां जमीन महंगी, वहां GST कम लगेगा :

ध्रुव एडवाइजर्स में भागीदार रंजीत महतानी ने कहा कि यह फैसला भारत भर में रियल एस्टेट व्यवस्थाओं और विकास समझौतों पर असर डालने की क्षमता के कारण काफी अहम है. खासतौर पर जमीनों की ऊंची कीमत वाले महानगरों में इस फैसले की वजह से खरीदारों को जीएसटी कम देना होगा.


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