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Forbes Women Power: 10वीं पास आशा वर्कर ने भारत को दिलाई नई पहचान, Forbes ने दुनिया की 10 पावरफुल महिलाओं की लिस्ट में रखा

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Forbes Women Power: मातिलता बताती हैं, कई बार ऐसा लगा था कि मुझे ये काम छोड़ देना चाहिए. लेकिन, हिम्मत नहीं हारी. 10वीं तक ही पढ़ी हूं, लेकिन जब गांव में जाने लगी तो लगा कि लोगों को समझना और समझाना भी एक पढ़ाई है. इसे बेहतर तरीके से करना है और आज तक वही करती आ रही हूं.

 

मैं स्कूल जाती थी तो मुझे आसान सवाल से ज्यादा कठिन सवाल अच्छे लगते थे. 10वीं तक पढ़ाई की है. लेकिन, कठिन सवालों को सॉल्व करने में खूब मेहनत करती थी. और जब वे सॉल्व हो जाते थे तो खुशी मिलती थी. आशा वर्कर का काम भी मेरे लिए ऐसा ही रहा है. 2006 में जब काम शुरू किया तो न तो मुझे इसके बारे में बहुत जानकारी थी और न गांव वालों को. लेकिन, आज ऐसा लगता है कि आशा वर्कर हैं तो गांव है. और मेरा नाम तो फोर्ब्स की (Forbes Women Power List) पावरफुल वूमेन की लिस्ट में आ गया. यह कहना है मातिलता कुल्लू का.

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46 साल की मातिलता(Matilda kullu) कहती हैं, “मैं फोर्ब्स मैगजीन के बारे में नहीं जानती थी. अखबार और दूसरी मैगजीन भी रेगुलर बेसिस पर नहीं पढ़ती हूं. कहीं दिख गयी और हेल्थ, महिलाओं या किसी महापुरुष पर कोई स्टोरी दिख गई तो पढ़ लेती हूं. बात में पता चला कि फोर्ब्स दुनिया की बहुत बड़ी मैगजीन है. मुझे खुशी है कि इसमें मेरा नाम छपा. एक आशावर्कर को पावरफुल वूमेन की लिस्ट में शामिल किया गया. इससे आशावर्करों को एक सम्मान और पहचान मिली.”

सुंदरगढ़ जिले के बड़ागांव तहसील से 8 किमी दूर गर्गडबहल गांव में रहने वाली मातिलता ने एक निजी समाचार एजेंसी को बताया कि हमें जो गांव दिया जाता है, उसके हर एक घर में जाकर बात करने, कोई बीमार है तो उसका डेटा कलेक्ट करने, उसका इलाज कराने के लिए 3 महीने का टास्क दिया जाता है. इस तीन महीने को हम दिन और घर के हिसाब से डिवाइड करते हैं और ये टार्गेट लेकर चलते हैं कि तीन महीने में इसे पूरा कर लेंगे. अब तो कोविड है तो कोविड को लेकर भी टेस्ट, आइसोलेशन, वैक्सीन ये सब देखना पड़ता है. नहीं तो पहले सिर्फ टीवी और दूसरे नॉन कम्यूनिकेबल डिसीज के मरीजों को देखना पड़ता है. इसके साथ ही बच्चों और प्रेग्नेंट महिलाओं के टीकों को भी देखना हमारा काम होता है.

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2005 में पहली बार आशा वर्कर के बारे में पता चला

वह कहती हैं, “2005 में पहली बार मैंने आशा वर्कर के बारे में सुना. सेल्फ हेल्प ग्रुप ने 3 गांव के लोगों को बुलाया. यहां हमें बताया गया कि एक आशा दीदी का सेलेक्शन होगा जो प्रेग्नेंट महिला को हॉस्पिटल ले जाएगी. उसका कमीशन 600 रुपये मिलेगा. इसके लिए हम 5 लोगों ने नॉमिनेशन किया. इसके बाद वोटिंग हुई और सेल्फ हेल्प ग्रुप के लोगों ने वोटिंग की. इसमें मुझे सबसे ज्यादा वोट मिले और मेरा सेलेक्शन हो गया.” मातिलता ने बताया कि मुझे अच्छे से याद है कि उन्होंने कहा था, “आपसे बेहतर सेवा कोई नहीं कर सकेगा, इसलिए आपका सेलेक्शन हुआ है.”


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