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PACL Chit Fund Scam : PACL के निर्मल सिंह भंगू का गोरखधंधा ! निवेशकों के पैसों से खड़ा किया 50,000 करोड़ का साम्राज्य.

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PACL Chit Fund Scam : रिफंड की प्रक्रिया के साथ ही उस शख्स की चर्चा भी जरूरी है, जो इस फ्रॉड के पीछे था. चिटफंट का संस्थापक और जिसने करीब 6 करोड़ निवेशकों से 49,100 करोड़ रुपए की धांधली की.

PACL Chit Fund Scam : चिटफंड पीएसीएल (PACL) या पर्ल्स ग्रुप (Pearls group) एक बार फिर चर्चा में है. SEBI ने एक बार फिर रिफंड प्रोसेस शुरू कर दिया है. इस बार 10001 रुपए से लेकर 15000 रुपए तक निवेश की राशि वालों को रिफंड मिलेगा. निवेशकों का पैसा वापस करने की प्रक्रिया 30 जून तक चलेगी. इसके लिए डॉक्युमेंट्स भेजने होंगे. PACL रिफंड की प्रक्रिया के साथ ही उस शख्स की चर्चा भी जरूरी है, जो इस फ्रॉड के पीछे था. चिटफंट का संस्थापक और जिसने करीब 6 करोड़ निवेशकों से 50,100 करोड़ रुपए की धांधली की. 

 

1.83 लाख एकड़ जमीन का साम्राज्य :

ये शख्स निर्मल सिंह भंगू (Nirmal Singh Bhangoo) है. बताते हैं निर्मल सिंह भंगू एक वक्त पर दूध का कारोबार करता था. चिटफंड के जरिए निवेशकों से पैसे जमा करते हुए निर्मल सिंह भूंग देखते-देखते 1.83 लाख एकड़ जमीन का मालिक बन गया. ये जमीन बंग्लुरु शहर के क्षेत्रफल से भी बड़ी थी.

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PACL के जरिए की धोखाधड़ी :

निर्मल सिंह भंगू ने 1996 में PACL की स्थापना एक रियल एस्टेट कंपनी की रूप में की. लेकिन, धोखे से कंपनी को निवेश स्कीम में बदल दिया. मार्केट रेगुलेटर SEBI ने अपनी जांच में पाया कि PACL ने निवेशकों को धोखा देकर उनसे करीब 50,100 करोड़ रुपए योजना के नाम पर लिए हैं. SEBI ने जब सख्ती की तो PACL सुप्रीम कोर्ट चला गया और वहां ये मामला 8 साल चला. इस दौरान PACL का आकार 100 गुना बढ़ गया. सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में PACL के खिलाफ फैसला दिया. निवेशक को लगता था कि उसने अपना पैसा बैंक FD की तरह जमा किया है, जबकि PACL अपने खाते में इसे प्रापर्टी खरीदने के लिए दिए गए एडवांस की तरह दिखाती थी.

 

pacl scam PACL Chit Fund Scam : PACL के निर्मल सिंह भंगू का गोरखधंधा ! निवेशकों के पैसों से खड़ा किया 50,000 करोड़ का साम्राज्य.

 

30 लाख एजेंट का विशाल नेटवर्क :

निवेशकों से मिले पैसे से निर्मल सिंह भंगू (Nirmal Singh Bhangoo) ने जमीन खरीदनी शुरू की और देखते-देखते वह 1.83 लाख एकड़ जमीन का मालिक बन गया. कंपनी देश भर में फैले अपने विशाल नेटवर्क के जरिए निवेशकों से पैसे लेती और उससे सस्ती जमीन खरीदती. देश भर में PACL के नेटवर्क का अंदाज इस बात से लगाया जा सकता है कि उसने सिर्फ 6-7 साल में 30 लाख एजेंट बना लिए थे. जमीन महंगी होने पर उसे बेचकर निवेशकों को 12.5% ब्याज के साथ पैसा वापस कर दिया जाता. अगर जमीन नहीं बिकी तो निवेशकों को देश में कहीं भी प्लाट देने का वादा किया जाता था. 2014 में SEBI ने PACL के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कहा कि उसने कलेक्टिव इन्वेस्टमेंट स्कीम (CIS) के नियमों का उल्लंघन किया है.

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क्रिकेट स्टार से कराया विज्ञापन :

निर्मल सिंह भंगू (Nirmal Singh Bhangoo) ने राजनीतिज्ञों और फिल्म स्टार के साथ नजदीकी बढ़ाईं. PACL ने IPL और कबड्डी टूर्नामेंट को भी स्पॉन्सर किया और न्यूज चैनल भी शुरू किया. ऑस्ट्रेलिया के क्रिकेटर ब्रेट ली को विज्ञापन के लिए साइन किया. बताया जाता है कि भंगू की ऑस्ट्रेलिया में कई प्रॉपर्टी थीं. 

 

कौन है निर्मल सिंह भंगू?

पर्ल्स ग्रुप का मालिक निर्मल सिंह भंगू पंजाब के बरनाला जिले का रहने वाला है. बताया जाता है कि वह जवानी के दिनों में अपने भाई के साथ साइकिल से दूध बेचता था. इसी दौरान उसने पॉलिटिकल साइंस में पोस्‍ट ग्रैजुएशन भी किया. इसके बाद नौकरी की तलाश में 70 के दशक में कोलकाता चला गया. जहां उसने एक फेमस इनवेस्टमेंट कंपनी पियरलेस में कुछ साल तक काम किया. उसके बाद इन्वेस्टर्स से करोड़ों की ठगी करने वाली हरियाणा की कंपनी गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड में काम करने लगा. इस कंपनी बंद होने के बाद निर्मल सिंह बेरोजगार हो गया.

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PACL से पहले भी बनाई थी कंपनी :

इसी कंपनी के काम करने के आइडिया के तहत उसने 1980 के दशक में पर्ल्‍स गोल्‍डन फॉरेस्‍ट (पीजीएफ) नाम की कंपनी बनाई. यह कंपनी भी गोल्डन फॉरेस्ट इंडिया लिमिटेड की तर्ज पर लोगों से सागौन जैसे पेड़ों के प्लांटेशन पर इंवेस्टमेंट कर कुछ वक्त बाद अच्छा मुनाफा लौटाने का वादा करती थी. 1996 तक इससे उसने करोड़ों की रकम जुटा ली थी. इस दौरान इनकम टैक्स और दूसरी जांचों के चलते इस कंपनी को बंद कर दिया.

 

पूरे देश में भंगू की अरबों रुपए की प्रॉपर्टीज :

पर्ल्स ग्रुप की प्रॉपर्टी देश के करीब हर छोटे और बड़े शहर में है. राजधानी दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चंडीगढ़, मोहाली समेत टॉप सिटीज इसमें शामिल हैं. दिल्ली के कनॉट प्लेस में ही पर्ल्स ग्रुप की करीब 61 प्रॉपर्टीज हैं, जिनकी कीमत अरबों में है. इसके अलावा दिल्ली में ही पर्लग्रुप की अरबों की जमीन भी है. मोहाली में तो पर्ल्स ग्रुप के हाउसिंग सोसायटी से लेकर हॉस्पिटल और मेडिकल कॉलेज तक हैं.


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