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Mutual Fund : श्रीमती के नाम पर इस स्कीम में शुरू करें निवेश ! मिलेगा करोड़ों रुपये का फायदा, जानिए क्या है तरीका.

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Mutual Fund Investment 2022 : अगर आप भी रिटायरमेंट की प्लानिंग कर रहे हैं, तो आप आज से ही अपनी पत्नी के नाम पर म्यूचुअल फंड( Mutual Fund ) में निवेश करना शुरू कर दें. इससे आप बुढ़ापे में यानी रिटायरमेंट के बाद आसानी से जीवन व्यतीत कर सकते हैं. आइए जानते हैं क्या है तरीका.

 

Mutual Fund Investment : अगर आप भी अपने रिटायरमेंट के बाद के सुखमय जीवन को जीना चाहते हैं तो ये खबर बस आपके लिए ही है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं स्पेशल इनवेस्टमेंट के बारे में, जिसमें निवेश कर आप करोड़पति बन सकते हैं. इसके लिए आप आज से ही अपनी पत्नी के लिए खास म्यूचुअल फंड में निवेश करना शुरू कर दें, इससे आप दोनों अपनी बुढ़ापे की लाइफ को ऐशों आराम से एन्जॉय कर सकेंगे.

दरअसल, नौकरी के समय में पैसों की उतनी चिंता नहीं रहती है जितनी रिटायरमेंट के बाद के लिए होती है. रिटायरमेंट के बाद के खर्चे के लिए आपको अभी से तैयारी कर लेनी चाहिए. 

इस प्रकार चुनें निवेश ऑप्शन :

एक्स्पर्ट्स के अनुसार, रिटायरमेंट के लिए सही प्लानिंग करने के लिए आपको सही निवेश ऑप्शन चुनना बहुत जरूरी है. अगर आपने गलत निवेश चुना तो आपको मुनाफे के बदले नुकसान भी हो सकता है. बढ़ती महंगाई को देखते हुए हमें ऐसे निवेश को चुनना चाहिए जिसमें महंगाई बढ़ने के साथ रिटर्न भी बढ़ता रहे. अंतिम कुछ सालों में बेहतर रिटर्न की वजह से म्यूचुअल फंड में लोगों को बहुत ज्यादा दिलचस्पी बढ़ी है.

म्यूचुअल फंड है बेहतर विकल्प :

दरअसल, शेयर बाजार में रिटर्न तगड़ा मिलता है लेकिन, वहां रिस्क फैक्टर भी ज्यादा है. जिन लोगों में रिस्क लेने की क्षमता होती है वो ही शेयर बाजार में निवेश कर सकते हैं. ऐसे में, म्यूचुअल फंड निवेश का एक जबरदस्त ऑप्शन है. अगर आप कम जोखिम में ज्यादा रिटर्न पाना चाहते हैं तो म्यूचुअल फंड में निवेश की प्लानिंग कर सकते हैं. इतना ही नहीं, अगर आपकी अच्छी खासी सैलरी है तो आप एक ऐसे स्कीम में निवेश कर सकते हैं, जो आपको मैच्योरिटी पर 2.45 करोड़ की बड़ी रकम दे सकता है. 

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SIP में करें 3500 रुपये मंथली निवेश :

एसआईपी ने पिछले कुछ समय में मार्केट में जबरदस्त पकड़ बनाई है. पिछले 10 वर्षों में म्यूचुअल फंड सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान यानी SIP में निवेश करने पर आपको लगभग 15 फीसदी का रिटर्न सालाना मिलता है.

अब कैलकुलेशन पर ध्यान देते हैं. अगर आपकी पत्नी की उम्र निवेश करते वक्त 30 साल है तो आप इसमें बाकी के कुल 30 साल तक 12.60 लाख रुपये निवेश कर सकते हैं. अब इस हिसाब से देखें तो 15 फीसदी के रिटर्न पर आपके पास 30 साल बाद करीब 2.45 करोड़ रुपये का फंड जमा होगा. म्यूचुअल फंड स्कीम में ब्याज दर कंपाउंडिंग पर होता है. और यही वजह है कि लोग सुरक्षित निवेश और बेहतर मुनाफे के लिए इसे चुनते हैं. 

आपको कैसे मिलेगा रिटर्न :       

स्कीम                                                         रिटर्न
SBI स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड  20.04 फीसदी
निप्पॉन इंडिया स्मॉल कैप म्यूचुअल फंड      18.14 फीसदी
इंवेस्को इंडिया मिडकैप म्यूचुअल फंड  16.54 फीसदी
डीएसपी मिडकैप म्यूचुअल फंड      15.27 फीसदी
कोटक इमर्जिंग इक्विटी म्यूचुअल फंड        15.95 फीसदी

 

 

FAQ : म्यूचुअल फंड्स से जुड़े कुछ सवालों के जवाब… 

 

(1) सवाल- म्यूचुअल फंड्स में पैसा लगाने के क्या फायदे होते है?


जवाब-
 पैसा बचाने और कमाने के कई तरीके हैं. लोग इसके लिए म्यूचुअल फंड में काफी इनवेस्ट करते हैं. उम्मीद होती है कि अच्छा रिटर्न मिलेगा. लेकिन म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले कुछ ऐसी बातें हैं जिन्हें ध्यान में रखना बहुत जरूरी है. ज्यादातर मामलों में आपको टर्म एंड कंडीशंस पता नहीं होती हैं, फिर भी आप पैसा लगा लेते हैं. आप इन तरीकों को अपनाकर ऐसी गलतियां करने से बच सकते हैं.

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(I) म्यूचुअल फंड में आमतौर पर देखा जाता है कि लोग बाजार गिरते ही घबराने लगते हैं और एसआईपी रोक देते हैं. इसके बाद जैसे ही बाजार बढ़ने लगे तो निवेश शुरू कर देते हैं.

(II) लेकिन ध्यान रहे कि ऐसा करने से आप अपना ही नुकसान कर रहे हैं. आप सभी मिलने वाले फायदे गंवा देते हैं. इतना इनवेस्ट करने के बाद ऐसा करना बेवकूफी साबित हो सकता है.

(III) म्यूचुअल फंड में लीड मैनेजर का रोल सबसे ज्यादा अहम होता है. इसीलिए अगर फंड मैनजमेंट की टीम में लगातार और काफी जल्दी बदलाव हो रहे हैं तो सावधान होने की जरूरत है. ऐसे में आप हमेशा इस हलचल पर अपनी नजर बनाए रखें.

(IV) कई बार देखा जाता है कि इनवेस्टर किसी फंड में इसलिए इनवेस्ट कर देता है, क्योंकि उसकी पास्ट परफॉर्मेंस काफी अच्छी होती है. लेकिन ध्यान रखें कि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है, जरूरी नहीं है कि अगर पहले किसी कंपनी ने अच्छा परफॉर्म किया है वो आगे भी ऐसा ही करेगी.

(V) फंड की कीमत हर तिमाही में बदलती रहती है. अगर आप तीन महीने पहले सोचते हैं कि ये फंड सही हैं, तो ये भी हो सकता है कि तीन महीने बाद उसकी रेटिंग कम हो जाए. इसीलिए इस आधार पर फैसला लेना गलत है.

 

Mutual Fund SIP Profit on Rs 5000 Mutual Fund : श्रीमती के नाम पर इस स्कीम में शुरू करें निवेश ! मिलेगा करोड़ों रुपये का फायदा, जानिए क्या है तरीका.

 

(2) सवाल-शेयर बाजार की तेजी या फिर गिरावट पर म्यूचुअल फंड्स में क्या करें? 

जवाब- वित्तीय सलाहकार बताते हैं कि जब  शेयर बाजार अपनी ऊंचाई के करीब पहुंच रहा होता है तो कई निवेशक यह सोचते हैं कि क्या उन्हें म्यूचुअल फंड स्कीम से प्रॉफिट बुक कर लेना चाहिए.

(I) इसी तरह से जब बाजार गिर रहा होता है तो कई निवेशक सोचते हैं कि नुकसान से बचने के लिए जल्द से अपना पैसा सुरक्षित कर लेना चाहिए.

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(II) एक्सपर्ट्स का मानना है कि अपने फंड से पैसे निकालने का यह सही तरीका नहीं है. इससे आपको नुकसान झेलना पड़ सकता है.

(III) निवेशकों को हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि ऐसी स्थिति में आपकी स्कीम के फंड मैनेजर प्रॉफिट बुकिंग करके आपके नुकसान को घटा रहे होते हैं.

(IV) फंड मैनेजर्स ऐसे शेयरों को लगातार बेच रहे होते हैं, जिनमें नुकसान हो रहा है या आगे नुकसान की संभावना है. साथ ही ऐसे स्टॉक्स में निवेश कर रहे होते हैं जिनका प्रदर्शन बढ़िया है. इसलिए बाजार के उतार-चढ़ाव पर स्कीम से निकलना बेहतर फैसला नहीं है.

 

(3) सवाल- अगर म्यूचुअल फंड्स की स्कीम में अच्छे रिटर्न नहीं मिले तब क्या करना चाहिए?


जवाब- 
आपने जिस स्कीम में पैसा लगाया है, वह अगर अंडरपरफार्म कर रही है तो इसकी समीक्षा बेहद जरूरी है. इसी तरह से हो सकता है कि स्कीम के फंडामेंटल्स में बदलाव आया हो और आपके पैरामीटर पर स्कीम खरी नहीं उतर रही हो. ऐसे में आपको अपने फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स की मदद लेनी चाहिए. इसके बाद स्कीम को भुनाया जा सकता है.

 

(4) सवाल- अगर पैसे की जरुरत है तब क्या करें?

जवाब- वित्तीय सलाहकार कहते हैं कि सभी ओपन-एंडेड म्यूचुअल फंड्स यानी जिनमें टैक्स सेविंग के लिए निवेश नहीं किया जाता है. इनमें आसानी से कभी बाहर निकला जा सकता है. अगर आपको आगे पैसे की अचानक जरूरत पड़ सकती है तो आपको लिक्विड या कॉन्टीजेंसी फंड में निवेश करना चाहिए. फंड को रिडीम करना ठीक नहीं हैं. इससे वित्तीय लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल हो सकता है. ये भी दिमाग में रखना जरूरी है कि टैक्स और एग्जिट लोड भी चुकाने पड़ सकते हैं.


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