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ICICI and Bank of Baroda: आइसीआइसीआइ और बैंक आफ बड़ौदा ने ग्राहकों को बड़ा झटका.

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ICICI and Bank of Baroda: रिजर्व बैंक द्वारा बुधवार को रेपो रेट बढ़ाने की घोषणा के बाद आइसीआइसीआइ बैंक और बैंक आफ बड़ौदा ICICI and Bank of Baroda ने रेपो रेट लिंक्ड कर्ज की दरों को बढ़ा दिया है। आइसीआइसीआइ बैंक  ICICI and Bank of Baroda ने इस दर को बढ़ा कर 8.10 प्रतिशत कर दिया है वहीं बैंक आफ बड़ौदा ICICI and Bank of Baroda ने 6.90 प्रतिशत कर दिया है।

कोरोना की मुसीबत से बमुश्किल बाहर निकली वैश्विक अर्थव्यवस्था के सामने महंगाई ने ऐसे रोड़े डाले हैं कि दुनिया के तमाम देशों के केंद्रीय बैंकों के पास ब्याज दरों को बढ़ाने के अलावा और कोई चारा नहीं बचा है। बुधवार को जहां भारत और अमेरिका के केंद्रीय बैंकों ने ब्याज दरों को प्रभावित करने वाली वैधानिक दरों में क्रमश: 0.40 फीसद और 0.50 फीसद की वृद्धि की है वहीं गुरुवार को बैंक आफ इंग्लैंड ने 0.25 फीसद की बढ़ोतरी कर दी है।

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सभी जानकार कह रहे हैं कि यूक्रेन-रूस युद्ध के वैश्विक इकोनमी पर दीर्घकालिक असर को देखते हुए ब्याज दरों के बढ़ने का दौर इस बार लंबा चलेगा। कई विशेषज्ञ तो यह मान रहे हैं कि ब्याज दरों में बढ़ोतरी अगले साल यानी वर्ष 2023 में भी जारी रहेगी। भारत के बारे में कहा जा रहा है कि आरबीआइ रेपो रेट अगले एक वर्ष के भीतर 0.75 फीसद से एक फीसद तक बढ़ा सकता है।

 

कर्ज महंगा होने की संभावना को देखते हुए कई बैंकों ने जमा दरों को पहले ही बढ़ाना शुरू कर दिया था। माना जा रहा है कि दूसरे बैंकों की तरफ से भी धीरे धीरे ब्याज दरों को बढ़ाने का फैसला कर लिया जाएगा। आरबीआइ के फैसले की समीक्षा करते हुए यस बैंक और एसबीआइ बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सितंबर, 2022 तक रेपो रेट में 0.75 फीसद की और वृद्धि हो सकती है।

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बुधवार की वृद्धि को शामिल किया जाए तो इस तरह से कुल 1.15 फीसद की बढ़ोतरी की तस्वीर बन रही है।यस बैंक ने कहा है कि अगले वित्त वर्ष भी रेपो रेट में 0.50 फीसद की वृद्धि की संभावना है। महंगाई के तेवर देख कर यह उम्मीद लगाई गई है। एसबीआइ ने अपनी इकोरैप रिपोर्ट में कहा कि जून और अगस्त में मौद्रिक नीति समीक्षा के दौरान बैंक संयुक्त तौर पर रेपो रेट में 0.75 फीसद की वृद्धि करेगा।

रिपोर्ट में कहा गया किदुनिया के दूसरे बैंक भी महंगाई को देखते हुए न सिर्फ कर्ज महंगा कर रहे हैं बल्कि सिस्टम से ज्यादा रकम भी बाहर निकालने की कोशिश में जुटे हैं जो बताता है कि महंगाई पर काबू पाना सभी देशों के लिए अब पहली प्राथमिकता बन चुकी है। दूसरी रिपोर्टें बताती हैं कि ब्याज दरों में वृद्धि की वजह से बैंकों का कर्ज वितरण प्रभावित होगा।


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