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Loan Recovery Agent: कर्ज वसूली के लिए ग्राहक को परेशान नहीं कर सकेंगे बैंक एजेंट! अब सख्त कदम उठाने की तैयारी में RBI

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Loan Recovery Agent: बैंकों की ओर से कर्ज वसूली के लिए नियुक्‍त किए जाने वाले एजेंटों के खराब व्‍यवहार पर आरबीआई ने सख्‍त रुख अपनाया है. रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि ऐसे व्‍यवहार और वक्‍त-बेवक्‍त ग्राहक को फोन किया जाना कतई बर्दाश्‍त नहीं है. इसके लिए बैंकों को सावधानीपूर्वक कदम उठाने चाहिए.

 

Loan Recovery Agent: बैंक के एजेंट अब कर्ज वसूली के लिए ग्राहकों को परेशान नहीं कर सकेंगे. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को इस पर चिंता जताते हुए सख्‍त रुख अपनाया. उन्‍होंने कहा कि बैंकों के एजेंटों का ग्राहक को परेशान करना बर्दाश्‍त नहीं किया जाएगा. गवर्नर दास ने एक प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में कहा, कर्ज वसूली के लिए एजेंटों द्वारा ग्राहक को वक्त-बेवक्त फोन करना, खराब भाषा में बात करना सहित अन्य कठोर तरीकों का इस्तेमाल कतई स्वीकार्य नहीं है. बैंकों के पास कर्ज वसूली का अधिकार है लेकिन इससे किसी को परेशानी नहीं होनी चाहिए. खासकर एजेंट की ओर से आने वाले फोन कॉल्‍स को लेकर बैंकों को पर्याप्‍त गाइडलाइन का पालन करना चाहिए और उन्‍हें दिशा-निर्देश भी दिए जाने चाहिए.

लोन रिकवरी एजेंट की हरकतें अस्वीकार्य

रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (RBI Governor Shaktikanta Das) ने शुक्रवार को कहा कि लोन रिकवरी एजेंट लोगों के साथ गलत व्यवहार करते हैं, जो कतई स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने कहा कि कर्जदारों को लोन रिकवरी एजेंट किसी भी समय फोन कर देते हैं और उनके साथ गलत व्यवहार करते हैं, जो कि अनएक्सेप्टेबल है. सेंट्रल बैंक इसे गंभीरता से ले रहा है और कड़े कदम उठाने से नहीं हिचकेगा. दास ने FE Modern BFSI Summit में कहा कि ऐसी हरकतें सामान्यत: अनरेगुलेटेड फाइनेंस कंपनियां ज्यादा करती हैं और कई बार रेगुलेटेड कंपनियों के मामले में भी ऐसी शिकायतें मिलती हैं.

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कड़े कदम से नहीं हिचकेगा सेंट्रल बैंक

दास ने कहा, ‘रेगुलेटेड कंपनियों (Regulated Entities) के मामले में रिजर्व बैंक गंभीरता से कदम उठाने जा रहा है. जहां तक अनरेगुलेटेड कंपनियों (Unregulated Companies) की बात है, ऐसी शिकायत मिलने पर लॉ एनफोर्समेंट एजेंसियों को अवगत कराया जाएगा. हम ऐसी किसी भी शिकायत पर कड़े कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे. बैंकों को इन गतिविधियों के बारे में सजग किया गया है. हर रोज नई चुनौतियां आती हैं. हम कर्जदाताओं और सभी बैंकों से इस बारे में खास ध्यान देने का अनुरोध कर रहे हैं.’

लोन रिकवरी एजेंट से निपटने के उपाय

आरबीआई की पहले से मौजूद गाइडलाइन (RBI Guideline) के अनुसार, लोन रिकवरी के लिए बाहुबल का इस्तेमाल करना या इस्तेमाल करने की धमकी देना उत्पीड़न के दायरे में आता है. अगर कोई रिकवरी एजेंट आपको परेशान कर रहा है, तो बिना देरी किए रिजर्व बैंक के पास इसकी शिकायत करें. इसके अलावा भी कर्जदारों के पास लोन रिकवरी एजेंट के अभद्र व्यवहार से निपटने के कानूनी रास्ते हैं. आइए जानते हैं कि किन उपायों से आप परेशानियों से बच सकते हैं…

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ये है लोन रिकवरी पर RBI का गाइडलाइन

रिजर्व बैंक के मुताबिक, लोन रिकवरी एजेंट कर्ज की वसूली के लिए धमकी या उत्पीड़न का सहारा नहीं ले सकते हैं, चाहे वो मौखिक हो या शारीरिक रूप में हो. कर्ज लेने वाले व्यक्ति को बार-बार फोन करना या सुबह 9 बजे से पहले और शाम 6 बजे के बाद फोन करना भी परेशान करने की श्रेणी में आता है. लोन रिकवरी के लिए बाहुबल का इस्तेमाल करना या इस्तेमाल करने की धमकी देना उत्पीड़न के दायरे में आता है. यही नहीं, लोन लेने वाले शख्स के घर या वर्कप्लेस पर बिना बताए जाकर रिश्तेदारों, दोस्तों या साथी कर्मचारियों को धमकाना और परेशान करना भी उत्पीड़न (Harassment) है. धमकी या अभद्र भाषा का इस्तेमाल भी इसे दायरे में आता है.

बैंक पर भी RBI लगा सकता है जुर्माना

अगर लोन रिकवरी एजेंट आपको परेशान करता है तो आपको सबसे पहले बैंक से इसकी शिकायत करनी चाहिए. साथ ही अपनी परिस्थितियों के बारे में बैंक को बताकर लोन रिपेमेंट की शर्तों पर काम करना चाहिए. बैंक से शिकायत का निवारण 30 दिन में नहीं होता है, तो बैंकिंग ओंबड्समैन से शिकायत की जा सकती है. रिजर्व बैंक को भी शिकायत की जा सकती है. रिजर्व बैंक, बैंक को निर्देश दे सकता है और स्पेशल केसेज में जुर्माना भी लगा सकता है.

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ग्राहक के पास कोर्ट में जाने का भी ऑप्शन

अगर रिकवरी एजेंट कोई गैर-कानूनी एक्शन लेता है, मान लो मारपीट करता है या कोई एसेट उठा ले जाता है तो कर्ज लेने वाला पुलिस में शिकायत कर सकता है. अगर बहुत ज्यादा तंग किया जाता है, तो वकील से संपर्क करके, रिकवरी एजेंट ने जो ज्यादती की है, जैसे कोई गलत लेटर लिखा हो या कोई गलत एक्शन किया हो, उसको आधार बनाकर अदालत भी जाया जा सकता है. लेनदार यानी कर्ज लेने वाले के पास लोक अदालत और कंज्यूमर कोर्ट में जाने का भी ऑप्शन है.


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