Follow Us On Goggle News

Income Tax Filing: ITR-1 में क्या हुए बदलाव, आइये जानते हैं कौन नहीं भर सकता यह फॉर्म

इस पोस्ट को शेयर करें :

Income Tax Filing: जिस व्यक्ति ने लिस्टेड इक्विटी शेयरों में निवेश किया है, कारोबार या व्यवसाय करता हो, किसी कंपनी का निदेशक हो, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194एन के तहत टैक्स कटौती होती हो, एक से अधिक घर है और उससे किराया मिलता है, ऐसा व्यक्ति आईटीआर-1 के तहत नहीं आएगा.

 

Income Tax Filing: आईटीआर-1 फॉर्म (ITR-1) कई लोग भरते हैं. इस फॉर्म में कई बारिकियां हैं जिनके बारे में समझना होता है. इसे समझे बिना फॉर्म भरें तो गलती की गुंजाइश होती है. इससे नोटिस आने का खतरा बढ़ जाता है. इसमें यह भी जानना जरूरी है कि कौन यह फॉर्म भर सकता है और कौन नहीं. इस फॉर्म में कुछ बदलाव किए गए हैं, उनके बारे में भी जानना और समझना जरूरी है. आईटीआर फॉर्म-1 को सहज कहते हैं जिसे छोटे और मीडियम दर्जे के टैक्सपेयर भरते हैं. अगर किसी व्यक्ति को सैलरी, घर के किराये या अन्य स्रोत से सालभर में 50 लाख रुपये तक की कमाई होती है, तो वह सहज फॉर्म यानी कि आईटीआर-1 के जरिये इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भर सकता है.

यह भी पढ़ें :  Flipkart Sale : Realme के लैपटॉप और टैब पर बंपर डिस्काउंट, कीमत 12,499 रुपये से शुरू.

 

आइए अब यह जान लेते हैं कि आईटीआर-1 फॉर्म को कौन नहीं भर सकता. इनकम टैक्स विभाग ने कुछ बदलाव कर बताया है कि यह फॉर्म कौन भर सकता है और कौन नहीं. इनकम टैक्स के अनुसार, कोई भी अनिवासी भारतीय (एनआरआई) यह फॉर्म नहीं भर सकता. जिसकी कुल आय 50 लाख से अधिक है, वह भी सहज या आईटीआर-1 फॉर्म नहीं भर सकता. जिनके पास 5000 रुपये से अधिक की कृषि आय है, जिसकी लॉटरी, रेसकोर्स, लीगल जुए से कमाई होती है, वे भी यह फॉर्म नहीं भर सकते.

जिस व्यक्ति ने लिस्टेड इक्विटी शेयरों में निवेश किया है, कारोबार या व्यवसाय करता हो, किसी कंपनी का निदेशक हो, इनकम टैक्स एक्ट की धारा 194एन के तहत टैक्स कटौती होती हो, एक से अधिक घर है और उससे किराया मिलता है, ऐसा व्यक्ति आईटीआर-1 के तहत नहीं आएगा. इस श्रेणी में आने वाला व्यक्ति आईटीआर-1 या सहज फॉर्म नहीं भर सकता.

यह भी पढ़ें :  Bank Rules : एक से ज्यादा बैंक अकाउंट हैं तो तुरंत हो जाएं सावधान! पैसे कटने समेत होंगे ये बड़े नुकसान.

आईटीआर-1 में क्या हुआ परिवर्तन

एसेसमेंट ईयर 2021-22 के लिए आईटीआर-1 में बदलाव किया गया है. इसमें एक नई धारा 115BAC जोड़ी गई है. इस बदलाव के अनुसार, यदि आप धारा 115BAC के तहत नई टैक्स व्यवस्था का ऑप्शन चुनते हैं तो नए आईटीआर फॉर्म में हां चुनें, वरना आपको नहीं चुनना होगा. इस बात का ध्यान रखें कि धारा 115BAC के तहत नई टैक्स व्यवस्था का विकल्प, धारा 139(1) के तहत आईटीआर फाइल करने की नियत तिथि तक ही उपलब्ध होगा.

आईटीआर-1 के लिए डॉक्यूमेंट

आईटीआर-1 फॉर्म भरने के लिए आपको फॉर्म 16, मकान का किराये से कमाई करते हैं तो उसकी रसीद, निवेश के पेमेंट की रसीद की जरूरत होगी. मैन्युअल रूप से या इलेक्ट्रॉनिक तौर पर, जिस ढंग से भी आईटीआर फाइल की जाए, आपको इन कागजातों को उसमें नत्थी करने की जरूरत नहीं होती. लेकिन इन सभी कागजातों को अपने पास रखना चाहिए ताकि बाद में जरूरत पड़ने पर टैक्स अधिकारियों के सामने इसे पेश किया जा सके.


इस पोस्ट को शेयर करें :

You cannot copy content of this page