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NSO Report : कर्ज में डूब रहे हैं भारत के किसान, जानिए हर परिवार पर कितना है कर्ज का बोझ.

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NSO की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण भारत में परिवारों पर औसतन कर्ज 60 हजार तो शहरों में यह 1.2 लाख रुपए है. ग्रामीण भारत में जो परिवार कृषि पर आधारित हैं, उनपर औसत कर्ज  74,460 रुपए है.

NSO की एक ताजा रिपोर्ट आई है जिसके मुताबिक, रूरल इंडिया में हर परिवार पर औसत कर्ज करीब 60 हजार रुपए है जबकि शहरी भारत में हर परिवार पर औसत कर्ज करीब 1.2 लाख रुपए है. ग्रामीण भारत में 35 फीसदी परिवारों पर कर्ज का बोझ है, जबकि शहरी भारत में केवल 22 फीसदी ऐसे परिवार हैं जिनपर किसी तरह का कर्ज है.

इस रिपोर्ट के मुताबिक, ग्रामीण भारत में जो परिवार कृषि पर आधारित हैं, उनपर औसत कर्ज 74460 रुपए है, जबकि गैर-कृषि आधारित परिवार पर औसत कर्ज 40432 रुपए है. अर्बन इंडिया में सेल्फ एंप्लॉयड पर औसत कर्ज 1.8 लाख रुपए और अदर हाउसहोल्ड पर यह 99353 रुपए है. रूरल इंडिया में कर्ज का 66 फीसदी हिस्सा इंस्टिट्यूशनल क्रेडिट एजेंसी जैसे बैंक, पोस्ट ऑफिस जैसे माध्यमों से है, जबकि 34 फीसदी कर्ज नॉन-इंस्टिट्यूशनल एजेंसियों (पेशेवर सूदखोरों) से है. शहरी भारत में नॉन इंस्टिट्यूशनल एजेंसियों से कर्ज की हिस्सेदारी महज 13 फीसदी है. 87 फीसदी इंस्टिट्यूशनल संस्थानों से लिया गया कर्ज है.

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50 फीसदी से अधिक परिवार कर्ज में : NSO की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, 2019 में 50 फीसदी से अधिक कृषक परिवार कर्ज में थे और उन पर प्रति परिवार औसतन 74,121 रुपए कर्ज था. सर्वे में कहा गया है कि उनके कुल बकाया कर्ज में से केवल 69.6 फीसदी बैंक, सहकरी समितियों और सरकारी एजेंसियों जैसे संस्थागत स्रोतों से लिए गए. जबकि 20.5 फीसदी कर्ज पेशेवर सूदखोरों से लिए गए. इसके अनुसार कुल कर्ज में 57.5 फीसदी लोन कृषि उद्देश्य से लिए गए.सर्वे में कहा गया है, ‘‘कर्ज ले रखे कृषि परिवारों का फीसदी 50.2 फीसदी है. वहीं प्रति कृषि परिवार बकाया लोन की औसत राशि 74,121 रुपए है.’’

कृषि परिवार की औसत इनकम 10218 रुपए : एनएसओ ने जनवरी-दिसंबर 2019 के दौरान देश के ग्रामीण क्षेत्रों में परिवार की भूमि और पशुधन के अलावा कृषि परिवारों की स्थिति का आकलन किया. सर्वे के अनुसार कृषि वर्ष 2018-19 (जुलाई-जून) के दौरान प्रति कृषि परिवार की औसत मासिक आय 10,218 रुपए थी. इसमें से मजदूरी से प्राप्त प्रति परिवार औसत आय 4,063 रुपए, फसल उत्पादन से 3,798 रुपए, पशुपालन से 1,582 रुपए, गैर-कृषि व्यवसाय 641 रुपए तथा भूमि पट्टे से 134 रुपए की आय थी.

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कृषि आधारित परिवार की संख्या 9.3 करोड़ : इसमें कहा गया है कि देश में कृषि परिवार की संख्या 9.3 करोड़ अनुमानित है. इसमें अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) 45.8 फीसदी, अनुसूचित जाति 15.9 फीसदी, अनुसूचित जनजाति 14.2 फीसदी और अन्य 24.1 फीसदी हैं. सर्वे के अनुसार गांवों में रहने वाले गैर-कृषि परिवार की संख्या 7.93 करोड़ अनुमानित है. इससे यह भी पता चला कि 83.5 फीसदी ग्रामीण परिवार के पास एक हेक्टेयर से कम जमीन है. जबकि केवल 0.2 फीसदी के पास 10 हेक्टेयर से अधिक जमीन थी.

ग्रामीण भारत में 35 फीसदी परिवार पर था कर्ज : इस बीच, एक अन्य रिपोर्ट में एनएसओ ने कहा कि 30 जून, 2018 की स्थिति के अनुसार ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज लेने वाले परिवार का फीसदी 35 था (40.3 फीसदी कृषक परिवार, 28.2 फीसदी गैर-कृषि परिवार) जबकि शहरी क्षेत्र में यह 22.4 फीसदी (27.5 फीसदी स्व-रोजगार से जुड़े परिवार, 20.6 फीसदी अन्य परिवार) थे. एनएसओ ने राष्ट्रीय नमूना सर्वे (एनएसएस) के 77वें दौर के तहत अखिल भारतीय कर्ज और निवेश पर ताजा सर्वे जनवरी-दिसंबर, 2019 के दौरान किया.

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17.8 फीसदी परिवार इंस्टिट्यूशनल एजेंसियों से लिया है कर्ज : सर्वे में यह भी पाया गया कि ग्रामीण क्षेत्रों में कर्ज ले रखे परिवारों में से 17.8 फीसदी परिवार संस्थागत एजेंसियों से (जिनमें 21.2 फीसदी कृषक परिवार और 13.5 फीसदी गैर-कृषक परिवार) जबकि शहरी क्षेत्रों में 14.5 फीसदी परिवार संस्थागत कर्जदाताओं से (18 फीसदी स्व-रोजगार करने वाले तथा 13.3 फीसदी अन्य परिवार) कर्ज ले रखे थे.

10.2 फीसदी परिवारों ने सूदखोरों से पैसे लिए हैं : इसके अलावा ग्रामीण भारत में करीब 10.2 फीसदी परिवारों ने गैर- संस्थागत एजेंसिंयों से कर्ज लिया जबकि शहरी भारत में यह संख्या 4.9 फीसदी परिवार थी. वहीं ग्रामीण भारत में सात फीसदी परिवार ऐसे थे जिन्होंने संस्थागत कर्ज और गैर-संस्थागत दोनों तरह से कर्ज लिया था जबकि शहरी क्षेत्र में ऐसे परिवारों की संख्या तीन फीसदी थी.


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