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UGC Order : UGC का विश्वविद्यालयों को सख्त निर्देश, सुनिश्चित करें कि कोई कर्मचारी, शिक्षक छात्रों से जाति आधारित भेदभाव न करें.

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UGC Order :  विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (University Grant Commission) ने कहा कि कर्मचारियों और शिक्षकों को सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए.

UGC Order : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों से यह सुनिश्चित करने को कहा है कि कोई भी कर्मचारी और शिक्षक किसी समुदाय के या किसी श्रेणी के छात्र के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करे. आयोग ने विश्वविद्यालयों से वर्ष 2020-21 के दौरान जाति आधारित भेदभाव की शिकायतों एवं उनके संबंध में की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी है.

विश्वविद्यालयों के कुलपतियों को लिखे पत्र ( UGC Order) में यूजीसी के सचिव रजनीश जैन ने कहा, ”कर्मचारियों और शिक्षकों को सामाजिक पृष्ठभूमि के आधार पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों के खिलाफ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करना चाहिए. विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालयों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोई कर्मचारी और शिक्षक किसी समुदाय के या किसी श्रेणी के छात्र के साथ किसी प्रकार का भेदभाव नहीं करे.”

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उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय, संस्थान या महाविद्यालय अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के छात्रों द्वारा ऐसी शिकायतें दर्ज कराने के लिये अपनी वेबसाइट पर पेज तैयार कर सकते हैं और पंजीयक एवं प्राचार्य के दफ्तर में शिकायत पुस्तिका रख सकते हैं. जैन ने अपने पत्र में कहा कि अगर अधिकारियों के संज्ञान में ऐसी कोई घटना आती है तब ऐसे कर्मचारियों या शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए.

UGC Order : आयोग ने कहा कि विश्वविद्यालय अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति एवं अन्य पिछड़े वर्ग के छात्रों, शिक्षकों या गैर-शिक्षण कर्मियों से भेदभाव ( UGC Order ) के संबंध में प्राप्त शिकायतों पर विचार के लिये एक समिति बना सकते हैं. जैन ने पत्र में कर्मचारियों एवं शिक्षकों से जाति आधारित भेदभाव के मामलों से निपटने में अधिक संवेदनशीलता का परिचय देने का भी आग्रह किया. उन्होंने वर्ष 2020-21 के लिये तय प्रारूप में विश्वविद्यालय गतिविधि निगरानी पोर्टल पर सूचना भेजने को भी कहा.

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UGC ने MPhil और PhD के लिए थीसिस जमा करने की आखिरी तारीख बढ़ाई : विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने टर्मिनल मास्टर ऑफ फिलॉसफी (एमफिल) और डॉक्टर ऑफ फिलॉसफी (पीएचडी) के छात्रों के लिए थीसिस जमा करने की समय सीमा दिसंबर के अंत तक बढ़ा दी है. विस्तार ‘शोध विद्वानों के बड़े हित को ध्यान में रखते हुए’ दिया गया है. एमफिल और पीएचडी उम्मीदवार अब 31 दिसंबर, 2021 तक अपनी थीसिस जमा कर सकते हैं.

यूजीसी ने अधिसूचना में कहा, ”बड़ी संख्या में अनुरोधों को ध्यान में रखते हुए और शोधार्थियों के बड़े हित को ध्यान में रखते हुए, 31 दिसंबर, 2021 तक एम.फिल / पीएचडी थीसिस जमा करने के लिए दिया गया विस्तार ऐसे सभी छात्रों पर भी लागू होगा जिनकी नियत तारीख एम.फिल/पीएचडी थीसिस जमा करने का समय 31.12.2021 को या उससे पहले है.”


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