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Misbehaviour of Bus Conductor : अब बस कंडक्टर सवारी से नहीं कर पायेगा दुर्व्यवहार, मानवाधिकार आयोग ने दिया सख्त आदेश.

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Misbehaviour of Bus Conductor : बस यात्रा के दौरान यात्रियों के साथ कंडक्टर के दुर्व्यवहार (Conductor’s Misbehaviour) को रिकॉर्ड करने के लिए रोडवेज कर्मचारियों द्वारा पीटे गए एक व्यक्ति को 20,000 रुपये का मुआवजा (compensation) देने का आदेश दिया और डीजीपी, हरियाणा को मामले में प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया.

Misbehaviour of Bus Conductor : हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने एक मामले की सुनवाई करते हुए हरियाणा सरकार द्वारा एक बस यात्री को तीन महीने के लिए 20 हजार रुपये प्रतिमाह मुआवजे के रूप में देने का फैसला सुनाया है। इसके साथ ही डीजीपी हरियाणा को आदेश दिया है मामले में आपराधिक व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करें। मामला तकरीबन दो साल पुराना और हरियाणा रोडवेज विभाग से जुड़ा है, जिसमें एक कंडक्टर द्वारा यात्री से दुव्र्यवहार व मारपीट की गई थी। इस मामले में यात्री के खिलाफ दर्ज गलत एफआईआर को भी रद्द किया जा चुका है।

आयोग ने कहा कि “यह एक ऐसा मामला है जहां एक अभिमानी सरकारी अधिकारी ने अपने अधिकार क्षेत्र को पार कर लिया है और मानवता के साथ काम नहीं किया है. उसने एक गुंडे की तरह काम किया और एक निर्दोष यात्री की पिटाई की ”. दरअसल एक शख्स पवन कुमार अपने भाई के साथ 6 सितंबर 2019 की रात को गुग्गा मंडी से हिसार के लिए बस में सवार हुआ था. कंडक्टर अनिल कुमार ने उससे पैसे लिए, लेकिन उसे टिकट नहीं दिया. पवन की जिद के बाद कंडक्टर ने उसे टिकट दे दिया.

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बस के बोनट पर पटका सिर : इसके बाद बस में सवार एक वृद्ध ने कंडक्टर से अपना बैलेंस वापस करने के लिए कहा, लेकिन वह उससे बहस करने लगा. इस दौरान पवन कुमार ने घटना की रिकॉर्डिंग शुरू की. इसके बाद ड्राइवर ने बस को रोका और पवन का फोन छीन लिया, वीडियो डिलीट कर दिया और बस के बोनट पर उसका सिर फोड़ दिया.

रोडवेज के अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर की गई पिटाई : इस दौरान जब बाकि यात्रियों ने मामले में हस्तक्षेप किया और कंडक्टर और ड्राइवर से (Misbehaviour of Bus Conductor ) बस को पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा, तो वे उसे हिसार में एक कार्यशाला में ले गए, जहां रोडवेज के अन्य कर्मचारियों के साथ मिलकर पवन कुमार की पिटाई की गई. इसके बाद पीड़ित एक पुलिस स्टेशन गया लेकिन वहां कुछ नहीं हुआ. हैरानी की बात यह है कि कंडक्टर की शिकायत पर पवन पर मामला दर्ज किया गया था.

कंडक्टर की शिकायत थी झूठी : अब मामले में हिसार के एसपी (Hisar SP) ने एचएचआरसी को बताया कि यह पवन कुमार के खिलाफ एक झूठी प्राथमिकी थी और इसे 2 दिसंबर, 2019 को रद्द कर दिया गया था. वहीं अब मामले में हरियाणा मानवाधिकार आयोग ने आदेश दिया कि कंडक्टर से 20,000 रुपये मुआवजा वसूल किया जा सकता है.

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क्या है पूरा मामला ?

दरअसल, हरियाणा रोडवेज की बस में यात्रा करने वाले पवन नामक व्यक्ति ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग को अपनी शिकायत देते हुए बताया कि 6-7 सितंबर 2019 की रात को जब वह अपने भाई के साथ गोगा मेडी, हिसार से जींद आ रहा था तो रात को 1:00 बजे कंडक्टर अनिल कुमार के साथ टिकट लेने के विषय पर कुछ विवाद हुआ क्योंकि वह पैसे लेने के बाद भी टिकट देने में आनाकानी कर रहा था और मुश्किल से उसे टिकट दी गई।

उसके बाद उक्त कंडक्टर (Misbehaviour of Bus Conductor ) का कुछ बुजुर्ग लोगों से भी टिकट ना देने को लेकर झगड़ा हुआ, जिसकी वीडियो बनाने का प्रार्थी ने प्रयास किया। जिस पर कंडक्टर अनिल कुमार भड़क गया तथा उसका मोबाइल फोन छीन लिया। प्रार्थी को चोटें भी लगी और शोर होने के बाद कंडक्टर ने ड्राइवर को बस को पुलिस स्टेशन ले जाने के लिए कहा परंतु पुलिस स्टेशन की बजाए वह बस को रोडवेज की वर्कशॉप में ले गए। जहां पर कई लोगों ने मिलकर प्रार्थी की पिटाई कर दी। जिसके बाद वह पुलिस थाने में उक्त अभियुक्तों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने गया परंतु पुलिस ने उसकी शिकायत ना दर्ज करके बाद में उल्टा प्रार्थी के खिलाफ यह झूठा मुकदमा बना दिया जिसे बाद में तफ्तीश करने पर झूठा पाया गया और एफआईआर को कैंसिल कर दिया गया।

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वहीं रोडवेज विभाग ने अपनी जांच के अंदर प्रार्थी के व्यवहार को तो गलत तो माना परंतु पूरी घटना की सत्यता को प्रमाणित नहीं किया। कंडक्टर अनिल कुमार का तबादला दूसरे जिले भिवानी में कर दिया गया परंतु उसके खिलाफ कोई और अपराधिक या कठोर कार्रवाई नहीं की गई।

इस विषय की शिकायत प्रार्थी ने हरियाणा मानव अधिकार आयोग ने को दी, जिसकी सुनवाई जस्टिस एसके मित्तल चेयरमैन हरियाणा मानव अधिकार आयोग व सदस्य दीप भाटिया ने की और पाया कि प्रार्थी के मानव अधिकारों का हनन किया गया है। ऐसे में मुआवजे के माध्यम से उसकी भरपाई की जानी आवश्यक है। अत: 20000/रु बतौर मुआवजा हरियाणा सरकार को तीन महीने देने के लिए कहा है, जिसे सरकार चाहे तो दोषी कर्मचारी से वसूल कर सकती है। साथ में ही आयोग की खंडपीठ ने डीजीपी हरियाणा को अपराधी व्यक्तियों के खिलाफ डॉक्टरी रिपोर्ट में बताई गई चोटों के अनुसार कार्रवाई करने का भी आदेश दिया है।


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