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Junior Engineer Vacancy : जूनियर इंजीनियर की वैकेंसी पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, भर्ती में सरकारी संस्थानों का आरक्षण किया समाप्त.

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Junior Engineer Vacancy cancelled : पटना हाईकोर्ट के द्वारा जूनियर इंजीनियरों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है. बताया जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संजय कुमार टीम के द्वारा यह फैसला सुनाया गया है.

 

Junior Engineer Vacancy : बिहार के पटना हाईकोर्ट के द्वारा जूनियर इंजीनियरों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है. मंगलवार को पटना हाईकोर्ट ने बिहार जल संसाधन विभाग सबऑर्डिनेट इंजीनियरिंग कैडर बहाली नियमावली के नियम 4 (ए) को निरस्त कर दिया है. बताया जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश जस्टिस संजय करोल और जस्टिस संजय कुमार टीम के द्वारा यह फैसला सुनाया गया है. उनका मानना है कि इस नियुक्ति प्रक्रिया में लगभग 40% पदों को सरकारी पॉलिटेक्निक संस्थानों के स्टूडेंटस की भर्ती को गलत ठहराया है और रिजल्ट की घोषणा को रद्द करते हुए, इसकी नियुक्ति पर भी रोक लगा दी है. हाईकोर्ट ने आदेश देते हुए कहा है कि इसकी मेरिट लिस्ट को एक नये सिरे से तैयार किया जाये. 

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नये सिरे से होगी काउंसलिंग : 

3 मार्च को इस मामले में सुनवाई के बाद फैसला आना बाकी था, जिसे मंगलवार 19 अप्रैल को सुनाया गया. जिसके बाद अब नये ,सिरे से काउंसलिंग करने के आदेश दिये गये हैं. इसी के आधार पर नई मेरिट लिस्ट तैयार की जायेगी. उसके बाद ही नियुक्ति को लेकर प्रकिया पूरी होगी. 

 

2019 में निकाली थी जूनियर इंजीनियर के लिए वैकेंसी :

जैसा की 2019 में जूनियर इंजीनियर की नियुक्ति को लेकर विज्ञापन दिया गया था. बिहार तकनीकी सेवा द्वारा लगभग 6379 वैकेंसी निकाली गई थी. जानकारी के मुताबिक राज्य सरकार ने राजकीय पॉलिटेक्निक संस्थानों से डिप्लोमा करने वाले स्टूड़ेंटस के लिए लगभग 40% पद आरक्षित रखें हैं.  जिसके कारण इसके रिजल्ट को लेकर पटना हाईकोर्ट ने चुनौती देते हुए एक नया फैसला सुनाया है.

 

सरकारी संस्थानों का 40% आरक्षण समाप्त :

बिहार तकनीकी सेवा के इस आरक्षित प्रकिया के बाद लोगों ने कोर्ट में याचिका ड़ाली थी. जिसमें याचिकाकर्ताओं की तरफ से लड़ने वाले वरीय अधिवक्ता निर्विकार का कहना है कि सरकारी और निजी पॉवटेक्निक संस्थानों में एक ही परिक्षा को अहमियत दी जायेगी और उसी से नामांकन लिया गया है. उन्होंने आगे बताया कि सरकारी पॉलिटेक्निक छात्रों को किसी भी प्रकार से 40 प्रतिशत का आरक्षण नहीं दिया जायेगा. यह कानूनी तौर पर सही नहीं है. इस पुरानी प्रक्रिया के कारण कम अंक प्राप्त करने वाले सरकारी संस्थानों के आवेदकों को आगे रखा जाता है और निजी संस्थान वाले छात्र पीछे रह जाते हैं. बताया जा रहा है कि सफल किये गये आवेदकों में लगभग दो हजार लोगों की कई अलग-अलग विभागों में नियुक्ति भी की जा चुकी है. 

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कोर्ट ने सुनाया अपना अंतिम फैसला : 

हालांकि यह मामला कोर्ट में पिछले काफी समय से चल रहा है. कोर्ट नें अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे कल मंगलवार को सुनाया गया. कोर्ट के द्वारा पहले ही कहा गया था कि जब पूर्ण रूप से फैसला आयेगा उसी को सही माना जाऐगा. उस वक्त नियुक्ति की प्रक्रिया को सिर्फ इसी आधार पर अनुमति दी गई थी कि अंतिम फैसले को ही आखिरी में लागू किया जाएगा.

 


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