Follow Us On Goggle News

Share Market Update: शेयर बाजार लगातार छठे दिन गिरा, क्या यह स्थिति संभलेगी या गिरावट जारी रहेगी?

इस पोस्ट को शेयर करें :

Share Market Update: आज लगातार छठे कारोबारी सत्र में बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ. बैंकिंग, मेटल्स और फाइनेंशियल स्टॉक का इंडेक्स हरे निशान में बंद हुआ. रिलायंस और बजाज ट्विन्स की मदद से बाजार निचले स्तरों से संभला और गिरावट का फासला कम हुआ.

 

आज लगातार छठे दिन शेयर बाजार (Share market updates) गिरावट के साथ बंद हुआ. आज सप्ताह का आखिरी कारोबारी सत्र था. आज सेंसेक्स में 135 अंकों की गिरावट दर्ज की गई और यह 51360 के स्तर पर और निफ्टी 67 अंकों की गिरावट के साथ 15293 के स्तर पर बंद हुआ. बैंकिंग, मेटल्स, फाइनेंशियल स्टॉक के इंडेक्स हरे निशान में बंद हुए जिससे गिरावट का फासला कम रहा. आज सेंसेक्स के टॉप-30 में 11 शेयर हरे निशान में और 19 शेयर लाल निशान में बंद हुए. आज बजाज फाइनेंस, बजाज फाइनेंशियल सर्विसेज, रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसी बैंक के शेयरों में तेजी रही. टाइटन, विप्रो और डॉ रेड्डी के शेयरों में सबसे ज्यादा गिरावट दर्ज की गई.

यह भी पढ़ें :  Multibagger Stock : इस NBFC स्टॉक ने सिर्फ 20 महीने में किया मालामाल, 1 लाख रुपये को बनाए 18 लाख रुपये.

 

यह लगातार दूसरा सप्ताह है जब बाजार में गिरावट रही है. इस सप्ताह सेंसेक्स में 5.42 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. साप्ताहिक आधार पर ओएनजीसी में 13.60 फीसदी, टेक महिंद्रा ने 13.32 फीसदी, हिंडाल्को में 13.27 फीसदी, विप्रो में 11.83 फीसदी और टाटा स्टील में 11.40 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई. रुपया 78.07 के स्तर पर बिना किसी बदलाव के बंद हुआ.

इंट्रेस्ट रेट हाइक और महंगाई की दोनों की चिंता

बाजार की स्थिति को लेकर कोटक सिक्यॉरिटीज के इक्विटी रिसर्च प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि बाजार पर इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी और महंगाई की डबल चिंता हावी है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बाजार के अनुमान से ज्यादा इंट्रेस्ट रेट में 75 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी की. ऐसे में अब आर्थिक मंदी को लेकर चर्चा प्रबल हो गई और निवेशकों के मन में इसकी चिंता भी समा गई है. आर्थिक सुस्ती के कारण ऑयल डिमांड में आई कमी से इसकी कीमत पर भी दबाव है.

यह भी पढ़ें :  Multibagger Stock : इस शेयर ने क‍िया कमाल ! 7 महीने में एक लाख बन गए ढाई करोड़, लोग सुनकर हुए हैरान.

स्विस नेशनल बैंक, बैंक ऑफ इंग्लैंड का भी दिखा प्रभाव

अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने महंगाई के 40 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचने के बाद 28 सालों में सबसे ज्यादा इंट्रेस्ट रेट में बढ़ोतरी की. यूएस फेड ने इंट्रेस्ट रेट 0.75 फीसदी बढ़ा दिया है. इसके बाद स्विस नेशनल बैंक ने पिछले 15 सालों में पहली बार इंट्रेस्ट रेट बढ़ाने का ऐलान किया. बैंक ऑफ इंग्लैंड ने लगातार पांचवीं बार इंट्रेस्ट रेट बढ़ाया है.

क्या है निवेशकों की समस्या?

रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार केंद्रीय बैंकों के सख्त रुख से निवेशकों के बीच आर्थिक ग्रोथ थमने की आशंका बन गई है. फेडरल रिजर्व के द्वारा मंदी की आशंका को लेकर सफाई दिए जाने के बाद भी बाजार में जारी गिरावट से संकेत हैं कि निवेशक मंदी को वास्तविक खतरा मान रहे हैं. रॉयटर्स के मुताबिक दरों की मौजूदा बढ़ोतरी अमेरिका के लिए 1994 के बाद की सबसे बड़ी बढ़त है. यूबीएस ग्लोबल के चीफ इनवेस्टमेंट ऑफिसर मार्क हेफले के हवाले से रिपोर्ट में लिखा है कि केन्द्रीय बैंक की सख्त नीतियां, इक्विटी बाजारों और अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ी चुनौती बन गई हैं. वहीं रिपोर्ट में एक अन्य एक्सपर्ट के हवाले से लिखा है कि फिलहाल केन्द्रीय बैंकों की नीतियां सिर्फ एक दिशा में हैं ऐसे में निवेशक इसी आधार पर अपनी निवेश रणनीतियां बना रहे हैं. उनके मुताबिक अगर मांग में असर पड़ता है तो कंपनियों की आय पर भी इसका असर दिखेगा जिससे स्टॉक में दबाव और बढ़ेगा इसलिए निवेशक इन स्टॉक्स से बाहर निकल रहे हैं.


इस पोस्ट को शेयर करें :

You cannot copy content of this page