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GST के दायरे में आने से महंगा हो जाएगा दही, लस्सी और छाछ, ग्राहकों पर पड़ेगा सीधा असर.

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GST Council की बैठक में लिए गए फैसले के बाद प्री-पैक्ड, प्री लेबल्ड दही, लस्सी और छाछ जैसे मिल्क प्रोडक्ट्स जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे. बताते चलें कि अभी तक इन उत्पादों पर किसी तरह का कोई जीएसटी नहीं लगता था.

 

GST on Milk Products : देश की आम जनता पर जल्द ही महंगाई की एक और मार पड़ सकती है. केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Finance Minister Nirmala Sitharaman) की अध्यक्षता में जीएसटी काउंसिल की 47वीं बैठक में कुछ खाद्य पदार्थों पर जीएसटी में मिलने वाली छूट को हटा दिया गया है. जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक में लिए गए इस फैसले के बाद प्री-पैक्ड, प्री लेबल्ड दही, लस्सी और छाछ जैसे मिल्क प्रोडक्ट्स जीएसटी के दायरे में आ जाएंगे. बताते चलें कि अभी तक इन उत्पादों पर किसी तरह का कोई जीएसटी नहीं लगता था. काउंसिल के इस फैसले के बाद डेयरी कंपनियों की लागत में बढ़ोतरी होगी, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर भी पड़ेगा और उन्हें दूध से बनने वाले उत्पादों के लिए पहले के मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी.

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छूट के दायरे में आने वाले खाद्य पदार्थों में संशोधन की सिफारिश के बाद हुआ फैसला :

बैठक में लिए गए इस फैसले को लेकर जीएसटी काउंसिल ने कहा कि अभी तक इस तरह के खाद्य पदार्थों और अनाज पर किसी तरह का कोई जीएसटी नहीं लगाया जा रहा था क्योंकि इनकी कोई ब्रांडिंग नहीं होती थी. लीगल मेट्रोलॉजी एक्ट के तहत प्री-पैक, प्री-लेबल उत्पादों के रिटेल पैक पर मिलने वाली छूट के दायरे को संशोधित करने की सिफारिश की गई थी, जिसमें प्री-पैक्ड, प्री लेबल्ड दही, लस्सी और छाछ जैसे मिल्क प्रोडक्ट्स भी शामिल हैं.

 

ग्राहकों के ऊपर पड़ेगा सीधा असर :

ICICI सिक्योरिटीज के रिसर्च अनालिस्ट अनिरुद्ध जोशी, मनोज मेनन, करण भुवानिया और प्रांजल गर्ग ने अपने रिसर्च नोट में कहा है कि सरकार ऐसे प्रोडक्ट्स पर 5 फीसदी का जीएसटी लगा सकती है, जिस पर अभी किसी तरह की कोई जीएसटी नहीं देनी होती है.

उन्होंने कहा कि जीएसटी लगाए जाने के बाद जब डेयरी कंपनियों पर लागत का बोझ बढ़ेगा तो वे इसे कम करने के लिए उत्पादों की कीमतें बढ़ा देंगे, जिससे ग्राहकों को पहले के मुकाबले ज्यादा पैसे खर्च करने होंगे. उन्होंने बताया कि किसी भी डेयरी कंपनी के रेवेन्यू में 15 से 25 फीसदी हिस्सेदारी दही और लस्सी की होती है.

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जानकार बताते हैं कि दही और लस्सी जैसे डेयरी प्रोडक्ट्स पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगने के बाद कंपनियां इनपुट क्रेडिट को अचीव करने में सक्षम होंगी. जिससे इसका प्रभाव कम होकर 2 से 3 फीसदी तक के भीतर रहेगा.


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