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ITR Filing 2022: सोना बेचने पर भी देना होगा टैक्स ? यहां जानें क्या हैं नियम.

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ITR Filing 2022: सोने का भारत में बहुत महत्व है. इसका सिर्फ आर्थिक महत्व ही नहीं बल्कि सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व भी है. यह निवेश के सबसे बेहतर विकल्पों में गिना जाता रहा है। भारतीय सोने में निवेश करना पसंद करते हैं।

 

ITR Filing 2022: वित्त वर्ष 2021-22 के लिए 31 जुलाई तक इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करना है। ITR फाइल करते समय सभी इनकम और केपिटल गेन्स की सही जानकारी देना जरूरी होता है।

 

लेकिन आप अगर सोने में निवेश करना चाहते हैं तो आपको सोने बेचने से हुए लाभ पर लगने वाले टैक्स की जानकारी होनी चाहिए। आप अगर टैक्स नहीं चुकाएंगे तो इसे टैक्स चोरी मानी जाएगी। आज हम आपको बता रहे हैं कि सोना बेचते समय आपको कितना इनकम टैक्स देना होगा।

किस तरह के गोल्ड पर कितना टैक्स? ITR Filing 2022

फिजिकल गोल्ड: फिजिकल गोल्ड में जूलरी और सिक्कों के साथ अन्य सोने की चीजें शामिल होती हैं। अगर आपने सोना 3 साल के अंदर बेचा है तो इसे शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस बिक्री से होने वाले फायदे पर आपके इनकम टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है। वहीं अगर सोने को 3 साल के बाद बेचा है तो इसे लॉग टर्म कैपिटल गेन माना जाता है। इस पर 20.8% टैक्स देना होता है।

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ITR Filing 2022

 

गोल्ड म्यूचुअल फंड या गोल्ड ETF: गोल्ड ETF और गोल्ड म्यूचुअल फंड्स से मिलने वाले लाभ पर फिजिकल गोल्ड की तरह ही टैक्स लगता है। इसको लेकर इनकम टैक्स के कोई अलग से नियम नहीं है।

ITR Filing 2022

सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड: बॉन्ड का मेच्योरिटी पीरियड 8 साल का है, लेकिन निवेशकों को 5 साल के बाद बाहर निकलने का मौका मिलता है। यानी अगर आप इस स्कीम से पैसा निकालना चाहते हैं तो 5 साल के बाद निकाल सकते हैं। हालांकि, अगर आप रिडेम्पशन विंडो (खुलने के 5 साल बाद) के पहले या सेकेंड्री मार्केट के जरिए बाहर निकलते हैं तो फिजिकल गोल्ड या गोल्ड म्यूचुअल फंड या गोल्ड ETF पर लगने वाले कैपिटल गेन टैक्स लगेंगे।

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गोल्ड बॉन्ड 2.50% की दर से ब्याज का भुगतान करते हैं और यह ब्याज आपके टैक्स स्लैब के अनुसार पूरी तरह से टैक्सेबल है। वहीं 8 साल पूरे होने पर इससे होने वाला कैपिटल गेन पूरी तरह टैक्स फ्री रहता है।

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कैपिटल गेन क्या है? मान लीजिए आपने कुछ साल पहले किसी प्रॉपर्टी या सोने में 1 लाख रुपए निवेश किया था। जो अब बढ़कर 2 लाख हो गया है तो इसमें 1 लाख रुपए को कैपिटल गेन माना जाएगा। इस पर ही आपसे टैक्स लिया जाएगा।

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