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Income Tax Rebate on Petrol : महंगे पेट्रोल-डीजल की खरीद पर बचा सकते हैं टैक्स, जानिए इसे क्लेम करने का सटीक तरीका.

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Income Tax Rebate on Petrol : फ्यूल या पेट्रोल अलाउंस उन कर्मचारियों को दिया जाता है जो कंपनी की गाड़ी या खुद की गाड़ी को कंपनी के काम में इस्तेमाल करते हैं. फ्यूल अलाउंस का लाभ कर्मचारी को उसके सैलरी स्ट्रक्चर में ही शामिल करके दिया जाता है.

Income Tax Rebate on Petrol : कंपनियां अपने कर्मचारियों को कई तरह के लाभ देती हैं. ये लाभ भत्ते और रीम्बर्समेंट के रूप में दिए जाते हैं. कंपनियों का इरादा उन टैक्स को कम करना है जो वेतन पाने वाला कर्मचारी अपनी मासिक सैलरी से भुगतान करते हैं. इन लाभों में छुट्टी यात्रा भत्ता यानी कि लीव ट्रेवल अलाउंस, ईंधन भत्ता, मोबाइल और इंटरनेट भत्ता, गैजेट भत्ता, फूड वाउचर और गिफ्ट वाउचर शामिल हैं.

लेकिन बहुत से लोग इस बात को नहीं जानते हैं कि पेट्रोल, डीजल की खरीद भी आपको टैक्स बचाने में मदद कर सकता है. ईंधन भत्ता हो ( Income Tax Rebate on Petrol ) या कार भत्ता, फ्यूल पर मिलने वाला रीम्बर्समेंट हो या तेल खरीदने का लाभ, इन सभी में कुछ प्रकार के टैक्स लाभ मिलते हैं.

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जीटा के सह-संस्थापक और सीटीओ, रामकी गद्दीपति कहते हैं, एक कंपनी अपने कर्मचारियों को सबसे लोकप्रिय और सबसे अधिक इस्तेमाल किए जाने वाले टैक्स-बचत सुविधा में से एक फ्यूल चार्ज के लाभ के रूप में दे सकता है.

ईंधन भत्ता या फ्यूल चार्ज के रूप में कर्मचारियों को सालाना 12,000 रुपये बचाने में मदद कर सकता है. आम तौर पर कॉर्पोरेट संगठनों द्वारा कर्मचारियों को ईंधन भत्ता, कार भत्ता, पेट्रोल भत्ता, फ्यूल रीम्बर्समेंट के रूप में लाभ दिया जाता है जिसे इनकम टैक्स ( Income Tax Rebate on Petrol ) के अंतर्गत मोटर कार भत्ता में शामिल किया गया है.

कब ले सकते हैं टैक्स लाभ :

फ्यूल या पेट्रोल अलाउंस उन कर्मचारियों को दिया जाता है जो कंपनी की गाड़ी या खुद की गाड़ी को कंपनी के काम में इस्तेमाल करते हैं. गद्दीपति के मुताबिक, फ्यूल अलाउंस का लाभ कर्मचारी को उसके सैलरी स्ट्रक्चर में ही शामिल करके दिया जाता है. इसका अर्थ हुआ कि कंपनी कर्मचारी की सीटीसी में बिना कोई बदलाव किए फ्यूल अलाउंस दे सकती है. फ्यूल अलाउंस टैक्स सेविंग ( Income Tax Rebate on Petrol) कंपोनेंट है जिसमें ड्राइवर की सैलरी भी आती है.

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आपको क्या करना होगा :

जीटा के सीटीओ गद्दीपति के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की खरीद पर टैक्स छूट का लाभ लेने के लिए कर्मचारी को खरीद की परची ( Income Tax Rebate on Petrol) कंपनी में जमा करनी होगी. इसी आधार पर उसे रीम्बर्समेंट मिलेगा. कर्मचारी जितने रुपये की परची जमा करेगा, उसी हिसाब से टैक्स छूट मिलेगी.

बिल अमाउंट पर 30 परसेंट तक टैक्स बचाया जा सकता है जबकि परची जमा नहीं करने पर पेट्रोल-डीजल खरीदने पर जितना पैसा खर्च हुआ है, उस पर टैक्स लग सकता है. पेट्रोल-डीजल के खर्च पर जीएसटी की छूट( Income Tax Rebate on Petrol) नहीं ले सकते क्योंकि यह अभी ईंधन जीएसटी में शामिल नहीं है. इसलिए इनपुट के तौर पर ईंधन खरीद में जो पैसा लगा है, उस पर जीएसटी में छूट नहीं ले सकते.

सावधानी रखें, नोटिस से बचें :

अगर कोई ग्राहक पेट्रोल-डीजल की खरीद पर इनकम टैक्स क्लेम ( Income Tax Rebate on Petrol) करता है तो उसे सावधानी के साथ करना चाहिए. क्लेम पूरा ऑनलाइन या डिजिटल हो चुका है जिस पर इनकम टैक्स विभाग की नजर बनी रहती है. इसलिए सही बिल पर ही टैक्स क्लेम करें क्योंकि छोटी सी गलती भी भारी पड़ सकती है.

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इस बिल या फ्यूल अलाउंस को क्लेम करने के लिए क्रेडिट या डेबिट कार्ड के स्टेटमेंट को अपने पास रखें. कहीं कोई सवाल खड़ा हो तो आप दिखा सकेंगे. कंपनी को आप कागज का बिल थमाते हैं तो कोई जरूरी नहीं कि उसके पास कागज सुरक्षित ही रहें. इसलिए जरूरी है कि अपने पास बैंक का स्टेटमेंट जरूर रखें ताकि टैक्स विभाग की कार्रवाई का सामना कर सकें.


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