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Health Policy Hike : होम लोन – कार लोन के बाद अब हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी हो गई महंगी, पहले से इतना बढ़ा प्रीमियम.

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Health Policy Hike : बढ़ती महंगाई के बीच हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी (Health Insurance Policy) भी महंगी हो गई है. कंपनियों का तर्क है कि कोरोना के चलते इलाज के प्रोटोकॉल में कई बदलाव हुए हैं. पहले से अधिक क्लेम सेटल भी किए जा रहे हैं. इससे कंपनियों का खर्च बढ़ा है. लिहाजा तीन-चार साल बाद पॉलिसी (Health Policy) महंगी की गई है.

 

Health Policy Hike : देश भर महंगाई चरम पर है. इस बढ़ती महंगाई के बीच हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी (Health Insurance Policy) भी महंगी हो गई है. कंपनियों का तर्क है कि कोरोना की दूसरी लहर में कंपनियों को बहुत अधिक क्लेम सेटल करना पड़ा. इससे कंपनियों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया. इस बोझ की भरपाई के लिए इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रीमियम (Health Policy Premium) को महंगा कर दिया. कई इंश्योरेंस कंपनियों ने प्रीमियम को बढ़ा दिया है. पॉलिसी में कई नई-नई शर्तें जोड़ दी गई हैं. यहां तक कि कवर का दायरा भी सिमटता जा रहा है. अगर आप इंश्योरेंस खरीदने का मन बना रहे हैं तो एक बार पॉलिसी की कीमत और कवर की शर्तें जरूर देख लें.

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हेल्थ इंश्योरेंस की दिग्गज कंपनी स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस ने अपने प्लान को पहले ही महंगा कर दिया है. इस कंपनी ने अपने प्रोडक्ट को 15 परसेंट तक महंगा किया है. इससे पॉलिसी का प्रीमियम पहले की तुलना में बढ़ गया है. अभी प्रमुख प्रोडक्ट की कीमतें बढ़ाई गई हैं, लेकिन बाद में अन्य प्रोडक्ट के रेट भी बढ़ाए जा सकते हैं. इसी तरह मणिपाल सिग्ना प्रोहेल्थ ने भी अपने इंश्योरेंस प्रोडक्ट को 14 परसेंट तक महंगा कर दिया है. इन कंपनियों का तर्क है कि कोरोना के चलते इलाज के प्रोटोकॉल में कई बदलाव हुए हैं. इससे हेल्थ क्लेम महंगे हो गए हैं. पहले से अधिक क्लेम सेटल भी किए जा रहे हैं. इससे कंपनियों का खर्च बढ़ा है. लिहाजा तीन-चार साल बाद पॉलिसी महंगी की गई है. स्टार हेल्थ की पॉलिसी जो पहले 16 हजार रुपये की होती थी, इस बार 22 हजार रुपये तक बढ़ गई है.

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क्यों बढ़ रहा प्रीमियम :

पॉलिसी की महंगाई के पीछे एक वजह भारत में स्वास्थ्य महंगाई दर में वृद्धि भी है. दुनिया के बाकी देशों की तुलना में भारत में स्वास्थ्य महंगाई दर अधिक है. इसका असर इलाज से लेकर इंश्योरेंस पॉलिसी की कीमतों पर देखा जाता है. जाहिर सी बात है कि इलाज महंगा होगा तो इंश्योरेंस कंपनियों का खर्च बढ़ेगा. क्लेम सेटलमेंट भी महंगा होगा. इसकी भरपाई करने के लिए कंपनियां या तो प्रीमियम बढ़ाती हैं या कवर को कम करती हैं. कोरोना के बाद हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां खरीदारों से टेस्ट रिपोर्ट मांग रही हैं. तीन महीने का वेटिंग पीरियड रखा गया है. अगर किसी को कोरोना हुआ है तो तीन महीने बाद ही हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी ली जा सकती है.

 

कंपनियों ने जोड़ी ये शर्त :

वेटिंग पीरियड की शर्त इसलिए जोड़ी गई है ताकि कोरोना पॉजिटिव लोगों से बचा जा सके. कंपनियों को लगता है कि कोविड पॉजिटिव व्यक्ति को पॉलिसी देने में खतरा हो सकता है और उनके उपचार का खर्च बढ़ सकता है. ये सभी खर्च इंश्योरेंस कंपनियों को भरना होगा. इससे बचने के लिए कंपनियों ने वेटिंग पीरियड का नियम रखा है. कोरोना निगेटिव की रिपोर्ट देने के बाद ही पॉलिसी दी जा सकेगी. यह नियम टर्म इंश्योरेंस के लिए है. टर्म इंश्योरेंस में कपनियों को लाखों रुपये का क्लेम देना होता है, इसलिए जोखिम से बचने के लिए ऐसी शर्तें लगाई जाती हैं. अगर किसी व्यक्ति के पास पहले से कोई हेल्थ प्लान नहीं है और वह टर्म इंश्योरेंस लेना चाहता है तो कंपनियां मेडिकल टेस्ट की रिपोर्ट मांग रही हैं. इसमें एक्सरे आदि की रिपोर्ट जरूरी है.


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