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Flight Tickets: क्या और महंगी होगी हवाई यात्रा? किराये की अपर लिमिट बढ़ने से महंगा होगा हवाई सफर

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Flight Tickets: पेट्रोल-डीजल और सीएनजी की तरह जेट फ्यूल (Jet Fuel) की कीमतें भी आसमान छू रही हैं. जेट फ्यूल वह ईंधन है जिस पर विमान उड़ते और रनवे पर दौड़ते हैं. हाल के दिनों में, खासकर रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद हर तरह के ईंधन महंगे हुए हैं. इनमें जेट फ्यूल या गैसोलीन भी एक है. जेट फ्यूल के महंगा होने से एयरलाइन कंपनियां परेशान हैं और उसका कोई समाधान ढूंढन में लगी हैं. इसी बीच घरेलू एयरलाइन कंपनी इंडिगो (Indigo Airline) ने सरकार से गुहार लगाई है कि हवाई किराये की अपर लिमिट को बढ़ाया जाए ताकि टिकटों के पैसे से जेट फ्यूल की भरपाई हो सके. अगर ऐसा होता है तो हवाई किराया या यूं कहें कि फ्लाइट टिकट महंगा हो सकता है. घोर महंगाई में यह एक और परेशानी का सबब होगा.

एयरलाइन कंपनियां कोविड की मार से सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं. पिछले दो साल का रिकॉर्ड देखें तो यह सेक्टर एक तरह से धराशायी सा हो गया है. कोरोना संक्रमण रोकने के लिए सभी तरह के हवाई सफर पर पाबंदी रही. अंतरराष्ट्रीय विमान तो बिल्कुल ठहर से गए. लॉकडाउन खुला भी तो यात्रियों की संख्या कम रही, जिससे कि कमाई बुरी तरह प्रभावित हुई. अब फ्लाइट सर्विस बहाल हुई है तो रूस-यूक्रेन युद्ध ने तेलों के दाम में आग लगा दिया है. जेट फ्यूल के रेट तेजी से ऊपर भाग रहे हैं. एयरलाइन कंपनियों को जब अपना पिछला घाटा पाटने का मौका आया तो तेल ने खेल खराब करना शुरू कर दिया. इससे बचने के लिए हवाई किराये की अपर लिमिट बढ़ाने की मांग की गई है. अपर लिमिट बढ़ने से ही टिकटों के दाम बढ़ाए जा सकते हैं.

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मौजूदा लोअर लिमिट

साल 2020 में सरकार ने हवाई किराये की लोअर और अपर लिमिट तय की थी. लोअर लिमिट के रूप में सरकार ने 2900 रुपये निर्धारित किए. यह कदम इसलिए उठाया गया ताकि एयरलाइन कंपनियों का नुकसान कम किया जा सके. उनका ऑपरेशन चलता रहे, इसके लिए सरकार ने लोअर लिमिट तय की. इसी के साथ सरकार ने अपर लिमिट के रूप में 8800 रुपये निर्धारित किए. ऐसा इसलिए किया गया ताकि यात्रियों की संख्या बढ़ने पर एयरलाइन कंपनियां किराया वसूली में मनमानी न करें. मनमानी पर अंकुश लगाने के लिए अपर लिमिट को 8800 रुपये पर फिक्स कर दिया गया.

नियम के अनुसार, 40 मिनट से कम की फ्लाइट के लिए कोई एयरलाइन कंपनी 2900 रुपये से कम किराया नहीं ले सकती. वही अधिकतम 8800 रुपये तक किराया वसूला जा सकता है. इन किरायों में जीएसटी शामिल नहीं है. आइए जानते हैं कि एयरलाइन कंपनियां अपर लिमिट बढ़ाने की मांग क्यों कर रही हैं. दरअसल, जेट फ्यूल की महंगाई के चलते अपर लिमिट बढ़ाने की मांग की जा रही है.

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कहां तक पहुंचा जेट फ्यूल का रेट

साल 2020 में जेट फ्यूल प्रति किलो लीटर की कीमत 66,266 रुपये थी. वही यह दाम 2021 में 77,532 रुपये और 2022 में 1,23,039 रुपये हो गए. यानी कि पिछले दो साल में जेट फ्यूल के दाम में दोगुने तक की बढ़ोतरी देखी गई है. जेट फ्यूल को एटीएफ या एविएशन टर्बाइन फ्यूल भी कहते हैं. फिलहाल एटीएफ के दाम में आग की वजह रूस-यूक्रेन युद्ध को बताया जा रहा है. ऐसे में इंडिगो एयरलाइन ने सरकार से गुजारिश की है कि हवाई किराये की अपर लिमिट बढ़ा दी जाए ताकि टिकट बिक्री से कुछ कमाई हो सके. एयरलाइन कंपनियों की कुल लागत में 40 फीसद हिस्सेदारी जेट फ्यूल की होती है. इस कारण एयरलाइन कंपनियां बेहद परेशान हैं. अगर अपर लिमिट बढ़ती है तो महंगे टिकट बेचकर कंपनियां कुछ भरपाई कर लेंगी, लेकिन हवाई यात्रा करने वालों की मुश्किलें बढ़ जाएंगी.


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