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Crypto Tax : क्रिप्टो एसेट को बेचने की सलाह दे रहे एक्सपर्ट, जानिए क्या है वजह.

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Crypto Tax in India : क्रिप्टो बेचने पर अगर घाटा होता है, तो उसे दूसरे क्रिप्टो एसेट की बिक्री से हुए मुनाफे से सेटऑफ नहीं कर सकते. यही वजह है कि क्रिप्टोकरेंसीके जानकार चालू वित्तीय वर्ष में ही क्रिप्टोकरेंसी को बेचने की सलाह दे रहे हैं. अगर 1 अप्रैल के बाद इसे बेचा जाए तो मुनाफे पर ऊंचा टैक्स (Crypto tax) तो देना ही होगा, अगर घाटा होता है, तो उसे अन्य मुनाफे के साथ पाट भी नहीं सकते.

Crypto Tax  : बिजनेस क्षेत्र के कई एक्सपर्ट इस वित्तीय वर्ष के अंत तक यानी कि 31 मार्च तक क्रिप्टो एसेट (Crypto Asset) बेचने की सलाह दे रहे हैं. यहां क्रिप्टो एसेट का अर्थ बिटकॉइन (Bitcoin), इथर और नॉन फंजीबल टोकन (NFT) को समझ सकते हैं. सरकार ने हालिया बजट में क्रिप्टो एसेट के बारे में कोई डिटेल जानकारी नहीं दी, क्रिप्टोकरेंसी के बारे में भी कुछ नहीं बताया. सरकार ने वर्चुअल डिजिटल एसेट या VDA की बात की. एक्सपर्ट इस वीडीए को क्रिप्टोकरेंसी और एनएफटी बता रहे हैं. बजट में क्रिप्टो एसेट के ट्रांजैक्शन पर 30 परसेंट टैक्स लगाने और 1 फीसदी टीडीएस काटने का नियम बनाया है. हालांकि इस टीडीएस को इनकम टैक्स रिटर्न में बिजनेस के साथ सेटऑफ किया जा सकता है. टैक्स की देनदारी और टीडीएस को देखते हुए जानकार बता रहे हैं कि नए वित्तीय वर्ष के शुरू होने से पहले क्रिप्टोकरेंसी जैसे कि बिटकॉइन आदि को बेच देना चाहिए.

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हम सभी जानते हैं कि किसी भी सरकार या बैंक द्वारा क्रिप्टो एसेट का कोई रेगुलेशन नहीं होने के कारण क्रिप्टोकरेंसी बहुत ही उतार-चढ़ाव वाली है. इसने बहुत से लोगों को इसमें निवेश करने और अवैध काम धंधे के लिए बढ़ावा दिया. हालांकि, भारत सरकार ने 2022 के बजट सत्र के दौरान भारत में इसके फैलाव और इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए हर लेनदेन पर लाभ और टीडीएस पर टैक्स लगाने की घोषणा की. क्रिप्टो से जुड़ा नया टैक्स कानून 1 अप्रैल से लागू हो रहा है. इसे देखते हुए कई जानकार इसे 31 मार्च तक बेचने की सलाह दे रहे हैं. एक सवाल यह उठता है कि अगर आप क्रिप्टो को होल्ड करते हैं तो क्या होगा?

क्या कहते हैं एक्सपर्ट :

एक्सपर्ट के अनुसार, हमें चालू वित्त वर्ष की समाप्ति से पहले लाभ या हानि को बुक करने के लिए अपनी क्रिप्टो होल्डिंग्स को बेच देना चाहिए. ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार केंद्रीय बजट में निर्धारित नियमों को बदलने के लिए तैयार नहीं है और क्रिप्टो इंडस्ट्री द्वारा सुझाए गए किसी भी सुझाव को नहीं माना गया है. नए कानून में क्रिप्टो बेचने पर जो लाभ होगा, उस पर 30 परसेंट टैक्स भरना होगा. अगर कोई व्यक्ति 1 अप्रैल के बाद क्रिप्टोकरेंसी बेचता है और लाभ कमाता है, तो उसे लाभ पर 30 परसेंट टैक्स सरकार को देना होगा.

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सबसे अहम बात कि क्रिप्टो बेचने पर अगर घाटा होता है, तो उसे दूसरे क्रिप्टो एसेट की बिक्री से हुए मुनाफे से सेटऑफ नहीं कर सकते. यही वजह है कि क्रिप्टोकरेंसी के जानकार चालू वित्तीय वर्ष में ही क्रिप्टोकरेंसी को बेचने की सलाह दे रहे हैं. अगर 1 अप्रैल के बाद इसे बेचा जाए तो मुनाफे पर ऊंचा ‘टैक्स तो देना ही होगा, अगर घाटा होता है, तो उसे अन्य मुनाफे के साथ पाट भी नहीं सकते. इसलिए अगले वित्तीय वर्ष में निवेशकों को एक साथ डबल घाटा दिख रहा है. क्रिप्टो इंडस्ट्री से जुड़े लोगों ने सरकार से टैक्स के नियमों पर विचार करने की बात कही थी, लेकिन सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया.

कैसे लगेगा क्रिप्टो पर टैक्स :

मान लें आपने 10,000 रुपये में क्रिप्टो खरीदा और उसे 12,000 रुपये में बेच दिया. आपको 2,000 रुपये का फायदा हुआ. इस 2,000 रुपये पर 30 परसेंट टैक्स देना होगा जो 600 रुपये होगा. अगर क्रिप्टो नहीं बेचते हैं, तो कोई टैक्स देने की जरूरत नहीं होगी. क्रिप्टो बेचने पर आपको नफा के बदले नुकसान होता है, तो कोई टैक्स देने की जरूरत नहीं होगी.

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इसका नियम है कि क्रिप्टो बेचने या खरीदने पर आपको घाटा हो या नफा, 1 परसेंट टीडीएस जरूर काटा जाएगा. मान लें आपने 40,000 रुपये में बिटकॉइन खरीदा है और उसे 40,000 रुपये में ही बेच रहे हैं. 1 परसेंट टीडीएस काटने के बाद आपके हाथ में 39,600 रुपये ही आएंगे. अगर आप इसी पैसे से बिटकॉइन या एनएफटी खरीद रहे हैं और बाद में उसे बिना किसी मुनाफे के बेच रहे हैं तो 1 परसेंट टीडीएस और कटेगा. आपको 39,204 रुपये ही मिलेंगे. हालांकि टीडीएस की इस कटौती को साल के अंत में आईटीआर में सेट-ऑफ कर सकते हैं.


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