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Credit Card : लाख में पहुंच जाएगा कुछ हजार का क्रेडिट कार्ड बिल, भूलकर भी न करें ऐसे पेमेंट.

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Credit Card Bill Rules : दरअसल क्रेडिट कार्ड से खर्च करने पर मजा तो बहुत आता है, लेकिन एक दो बार बिल न भर पाए तो मजा किरकिरा हो जाता है. बिल पर ब्याज पर महीने का 3-4 परसेंट होता है जबकि सालाना इसकी दर 36 से 48 परसेंट हो जाती है.

 

Credit Card Rules : गरिमा की नई-नई नौकरी लगी. पगार थी 40,000 रुपये. पहली नौकरी और 40 हजार की तनखा बड़ी बात है. गरिमा ने पढ़ाई के दौरान कई अरमान पाल रखे थे कि नौकरी लगते ही ये करूंगी, वो करूंगी. अब नौकरी लगी तो अरमान भी हिलकोरे मालने लगे. गरिमा का एक ख्वाब क्रेडिट कार्ड भी लेने का था. अपनी सहेलियों को वह झट से कार्ड निकालने और पेमेंट करते हुए देखा था. सो, गरिमा ने भी अप्लाई किया और उसे फौरन क्रेडिट कार्ड मिल भी गया. गरिमा ने कार्ड से धड़ाधड़ शॉपिंग की और सूट से लेकर चश्मा तक खरीद लिया. अब उसका बिल आ गया 30,000 रुपये का. बिल में मिनिमम अमाउंट ड्यू (एमएडी) लिखा था 2,000 रुपये.

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गरिमा ने सोचा कि वाह, 30,000 का बिल 2,000 रुपये की चुकौती से भी निपट सकता है. उसने फौरन 2,000 रुपये का मिनिमम अमाउंट ड्यू जमा करा दिया. ऐसा ही पैटर्न कई महीने तक चलता रहा. चौथे महीने में उसके हाथ में 80,000 रुपये का बिल आ गया. बिल की रकम देखकर गरिमा के होश फाख्ता हो गए. उसने तुरंत बैंक के बंदे से बात की और बिल का हिसाब जाना. बैंक के बंदे ने बताया कि गरिमा ने चूंकि मिनिमम अमाउंट भरा है, इसलिए ब्याज जुड़ते-जुड़ते इतने रुपये का बिल आ गया है.

 

खर्च ठीक लेकिन समय पर बिल पेमेंट जरूरी :

दरअसल क्रेडिट कार्ड से खर्च करने पर मजा तो बहुत आता है, लेकिन एक दो बार बिल न भर पाए तो मजा किरकिरा हो जाता है. बिल पर ब्याज पर महीने का 3-4 परसेंट होता है जबकि सालाना इसकी दर 36 से 48 परसेंट हो जाती है. एमएडी या मिनिमम अमाउंट ड्यू आपके कुल आउटस्टैंडिंग बैलेंस का 5 परसेंट होता है. अगर ग्राहक केवल एमएडी भरता है तो बैंक पूरे आउटस्टैंडिंग पर ब्याज वसूलता है.

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इसे एक उदाहरण से समझें. मान लें दूसरे महीने में गरिमा के क्रेडिट कार्ड का आउटस्टैंडिंग बैलेंस 10,000 रुपये है. इस अमाउंट पर 3 परसेंट के हिसाब से 300 रुपये का बैलेंस बनेगा. इस तरह कुल बकाया रकम 10300 रुपये होगी. दूसरे महीने में एमएडी 309 रुपये का था जिसे चुकाने के बाद गरिमा का बकाया 9991 रुपये हो गया. इस राशि पर ब्याज 300 रुपये लगा और तीसरे महीने में कुल बकाया 10291 रुपये का हो गया. चौथे महीने में 515 रुपये का एमएडी चुकाया गया और आउटस्टैंडिंग बैलेंस 9776 रुपये हो गया.

 

लाख में बदल सकता है कुछ हजार का बिल :

अब जरा देखिए. गरिमा ने दूसरे महीने में 309 रुपये और तीसरे महीने में 515 रुपये का एएमडी चुकाया जो कि कुल राशि 809 रुपये हो गई. इसके बाद भी गरिमा का कुल आउटस्टैंडिंग अमाउंट मात्र 224 रुपये ही कम हुआ जबकि उसने 809 रुपये चुकाए हैं. इस तरह एमएडी चुकाने से कुछ हजार रुपये का बिल कुछ ही महीने में लाख में पहुंच सकता है. इससे बचने का तरीका यही है कि ब्याज मुक्त अवधि में ही आउटस्टैंडिंग अमाउंट चुकाया जाए, न कि मिनिमम अमाउंट ड्यू.


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