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Budget 2022: आज आएगा मोदी सरकार का 10वां बजट, जानिए पिछले साढ़े सात सालों में कितनी मिली राहत, किसकी जेब हुई ढीली!

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आज यानी 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) देश का बजट (Budget 2022) पेश करने वाली हैं। यह उनका चौथा बजट है। उम्मीद की जा रही है कि इसमें आम आदमी को टैक्स में छूट मिल सकती है, क्योंकि कोरोना काल में लोगों की आमदनी पर बड़ा असर पड़ा है। ऐसे में टैक्स में छूट (Tax Benefits) देकर आम जनता को बड़ी राहत दी जा सकती है। इसी बीच यूपी समेत 5 राज्यों में चुनाव (UP Election) भी हैं, इसलिए भी मोदी सरकार बजट के जरिए लोगों को लुभाने की कोशिश कर सकती है। जहां एक ओर आम आदमी को तमाम राहत देने की कोशिश हुई, वहीं अरबपतियों पर लगने वाले सरचार्ज को लगाया बढ़ाया गया। हालांकि, सवाल ये उठता है कि मोदी सरकार ने पिछले करीब साढ़े सात सालों में जनता को कितनी राहत दी है।

टैक्स-फ्री इनकम में हुई बढ़ोतरी
मोदी सरकार ने सत्ता में आते ही लोगों को टैक्स-फ्री इनकम का तोहफा दिया था। 2014 के बजट में तत्कालीन वित्त मंत्री दिवंगत अरुण जेटली ने टैक्स फ्री इनकम की सीमा 2 लाख रुपये से बढ़ाकर 2.5 लाख रुपये कर दी थी। हालांकि, उसके बाद से अब करीब साढ़े सात साल हो गए हैं, लेकिन इस सीमा को जस का तस रखा गया है।

इस तरह 5 लाख तक की आय को बनाया टैक्स फ्री
मोदी सरकार ने भले ही पिछले करीब साढ़े सात सालों में टैक्स छूट की सीमा को 2.5 लाख के ऊपर नहीं बढ़ाया है, लेकिन 2019 के बजट में एक ऐसा तरीका जरूर इजात किया है, जिससे लोगों की 5 लाख रुपये तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगता है। अगर आपकी सैलरी 5 लाख रुपये तक है तो उस पर 2.5 लाख टैक्स फ्री होता है और बचे 2.5 लाख रुपये पर सरकार 5 फीसदी टैक्स की अतिरिक्त छूट दे देती है, जिससे लोगों की आय 5 लाख रुपये तक टैक्स फ्री हो जाती है। हालांकि, अगर आपकी टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से एक रुपये भी अधिक हुई तो आपको यह छूट नहीं मिलती है और 2.5 लाख रुपये की टैक्स छूट के अलावा बाकी सारी आमदनी पर आपको टैक्स चुकाना होता है।

साल 2020 में लाया गया नया टैक्स स्लैब सिस्टम
पुराने टैक्स स्लैब में तमाम तरह के डिडक्शन के चलते वह बहुत ही जटिल हो गया है। ऐसे में टैक्स रिटर्न फाइल करना एक जटिल प्रक्रिया बन चुकी है। इससे निजात दिलाने के लिए मोदी सरकार 2020 के बजट में एक नई टैक्स व्यवस्था लाई थी। इसके तहत एक नया टैक्स सिस्टम लाया गया, जिसमें कोई डिक्शन नहीं मिलता, लेकिन टैक्स की दर कम होती है। हालांकि, इसे अधिकतर लोगों ने पसंद नहीं किया है। असेसमेंट ईयर 2021-22 का आईटीआर फाइल करने में देखा गया है कि सिर्फ 5 फीसदी लोगों ने ही नए सिस्टम को अपनाया है, बाकी लोग पुराने सिस्टम से ही टैक्स भरते चले आ रहे हैं।

मोदी सरकार के पिछले 9 बजट में क्या मिला और क्या छिना?
*साल 2014 के बजट में टैक्स छूट की सीमा को 2 लाख से बढ़ाकर ढाई लाख किया गया और 80सी के तहत डिडक्शन की सीमा को 1 लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख रुपये किया गया। होम लोन के ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा को भी 1.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये किया गया।

*साल 2015 के बजट में सेक्शन 80CCD (1b) के तहत एनपीएस में निवेश पर 50 हजार रुपये की टैक्स छूट लाई गई। वहीं 1 करोड़ रुपये से ज्यादा की सालाना कमाई करने वालों पर लगाए जाने वाले सरचार्ज को 10 फीसदी से बढ़ाकर 12 फीसदी कर दिया गया।

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*मोदी सरकार ने 2016 में 5 लाख रुपये तक कमाने वालों के लिए टैक्स रिबेट 2000 रुपये से बढ़ाकर 5 हजार रुपये की। साथ ही घर का किराया देने वालों के लिए टैक्स छूट को 24 हजार रुपये से बढ़ाकर 60 हजार रुपये कर दिया गया। 35 लाख रुपये तक के होम लोन पर ब्याज पर टैक्स छूट की सीमा 50 हजार रुपये कर दी गई। वहीं 1 करोड़ रुपये से अधिक कमाने वालों पर सरचार्ज फिर से बढ़ाया गया और इसे 12 फीसदी से बढ़ाते हुए 15 फीसदी कर दिया गया।

*साल 2017 के बजट में 2.5 से 5 लाख रुपये पर लगने वाला टैक्स 10 फीसदी से घटाकर 5 फीसदी किया गया। ऐसा करते ही 5 लाख रुपये तक की आय वालों की पूरी इनकम टैक्स फ्री हो गई। वहीं 50 लाख से 1 करोड़ तक कमाने वालों पर 10 फीसदी सरचार्ज लगाया गया।

*कई साल पहले बंद हुई एक व्यवस्था साल 2018 के बजट में फिर शुरू की गई। 2018 में स्टैंडर्ड डिडक्शन को वापस लाया गया, जिसके तहत नौकरीपेशा लोग 40 हजार रुपये तक का सीधे-सीधे डिडक्शन पा सकते थे। इस नई व्यवस्था के बदले 15 हजार रुपये के मेडिकल रीइंबर्समेंट और 19,200 रुपये के ट्रांसपोर्ट अलाउंस को खत्म किया गया। वहीं सेस को 3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी भी कर दिया गया।

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*साल 2019 के बजट में पीयूष गोयल ने 5 लाख रुपये तक की आय को टैक्स फ्री करने की घोषणा की, लेकिन एक शर्त पर। इसके तहत टैक्सेबल इनकम 5 लाख रुपये से अधिक नहीं होने पर 12,500 रुपये की रिबेट मिलती है, जिससे 5 लाख रुपये तक की आय टैक्स फ्री हो जाती है। साथ ही स्टैंडर्ड डिडक्शन को भी 40 हजार रुपये से बढ़ाकर 50 हजार रुपये कर दिया गया। साथ ही बैंक या डाकघरों में जमा पैसों पर मिलने वाले 40 हजार रुपये तक के ब्याज को टैक्स फ्री किया गया। इसी साल अंतरिम बजट भी पेश हुआ था।

*साल 2020 के बजट में नई टैक्स स्कीम लाई गई, जिसमें किसी डिडक्शन का फायदा नहीं मिलता है, लेकिन टैक्स की दरें बहुत कम होती हैं।

*साल 2021 के बजट में सरकार ने 75 साल से अधिक की उम्र के पेंशनर्स को टैक्स रिटर्न फाइल करने से छूट दे दी। हालांकि, इसके लिए एक शर्त ये थी कि शख्स की कमाई का जरिया या तो बैंक से मिलने वाला ब्याज हो या फिर पेंशन हो।


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