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Fake Coins : 10 रुपये के ‘नकली सिक्के’ पर सरकार ने दी ये बड़ी जानकारी, संसद में बताई पूरी बात.

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Fake Coins : क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ है लाला की दुकान पर 10 रुपये का सिक्का लेने से मना कर दिया गया हो. यह कहते हुए कि सिक्का नकली है. अगर ऐसी बात है तो आपको सरकार की बात सुननी चाहिए जिसमें बताया गया है कि 10 का सिक्का नकली नहीं है और सभी सिक्के वैध हैं.

Fake coins of 10 Rupees  : कभी आपके साथ भी ऐसा हुआ होगा. लाला की दुकान या खोमचे वाले ने आपके 10 रुपये के सिक्के (Rs 10 coin) को लेने से मना कर दिया होगा. यह कहते हुए कि ये वाला सिक्का नहीं चलेगा. हो सकता है ये भी सुनने को मिला हो कि यह 10 रुपये का सिक्का नकली (Fake coins) है. आपके लाख तर्क के बावजूद दुकानदार या खोमचे वाला 10 रुपये का सिक्का न लिया हो और आप खाली हाथ घर लौट आए हों. ऐसी शिकायतें देश के कई हिस्सों से आती हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि 10 रुपये के सिक्के पर कई अलग-अलग आकृतियां या चित्र बने होते हैं. ऐसे में दुकानदार यह तय कर पाने में असमर्थ होते हैं कि कौन सिक्का असली (legal tender) है या कौन चलेगा या नहीं चलेगा. उनके अपने तर्क होते हैं और ग्राहक इसमें कुछ नहीं कर सकते. अब 10 रुपये का सिक्का चलाने के लिए कोर्ट-कचहरी या पुलिस-थाने का चक्कर नहीं लगा सकते.

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सरकार ने इस पर अपनी स्पष्ट राय रख दी है. दरअसल, संसद में यह सवाल पूछा गया कि 10 का सिक्का नहीं चलने की शिकायतें आती हैं तो क्या इसमें भी नकली है. इस पर सरकार ने जवाब दिया है.

 

सभी सिक्के वैध हैं, कोई नकली नहीं :

देश में 10 रुपये का सिक्का अलग-अलग साइज, थीम और डिजाइन में जारी किया जाता है. ये सभी सिक्के लीगल टेंडर हैं, यानी कि पूरी तरह से वैध हैं. इन सभी अलग-अलग सिक्कों को लेनदेन के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं. केंद्र सरकार ने इसका स्पष्ट निर्देश दिया है. इन अलग-अलग सिक्कों को लेने से या नहीं चलाने से कोई इनकार नहीं कर सकता.

इन सिक्कों की वैधता के बारे में सरकार ने संसद में जानकारी दी है. केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री पंकज चौधरी ने बुधवार को संसद में कहा, 10 रुपये के सिक्के अलग-अलग साइज, थीम और डिजाइन में जारी किए जाते हैं. इसे भारत सरकार के अधिकार में ढाला जाता है और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया द्वारा सर्कुलेट या चलाया जाता है. ये सभी सिक्के वैध (लीगल टेंडर) हैं और हर तरह के ट्रांजैक्शन में इस्तेमाल किए जा सकते हैं. पंकज चौधरी ने बुधवार को राज्यसभा में एक लिखित जवाब में यह बात कही.

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सरकार ने क्या दिया जवाब :

संसद में यह सवाल पूछा गया था कि क्या देश के कई हिस्सों में 10 रुपये के सिक्के नहीं चल रहे? क्या इसे नकली सिक्का मान कर नहीं लिया जा रहा? एक सवाल यह भी पूछा गया कि सरकार 10 रुपये के सिक्के को लीगल टेंडर बनाने के लिए क्या कदम उठा रही है? इस पर वित्त राज्यमंत्री ने संसद में लिखित जवाब दिया. पंकज चौधरी ने कहा, समय-समय पर कई जगहों से 10 रुपये के सिक्के नहीं चलाए जाने या स्वीकार नहीं करने की शिकायतें मिलती हैं. उन्होंने कहा कि आम जनता इस बात की शिकायत करती है कि बाजार में कभी-कभी 10 रुपये का सिक्का नहीं चलता और उसे नकली बताकर लेने से मना कर दिया जाता है.

संसद में पंकज चौधरी ने कहा कि 10 रुपये के सिक्के किसी भी साइज, आकृति या डिजाइन में हों, वे सभी लीगल टेंडर हैं और उसे लेने से मना नहीं कर सकते. पंकज चौधरी ने कहा कि इस बारे में लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए और उनके दिमाग से नकली का डर निकालना चाहिए. रिजर्व बैंक समय-समय पर प्रेस रिलीज जारी कर बताता है कि सिक्कों को लीगल टेंडर मानते हुए स्वीकार किया जाए. बिना किसी हिला-हवाला इन सिक्कों का इस्तेमाल सभी तरह के ट्रांजैक्शन में किया जाना चाहिए. रिजर्व बैंक जागरुकता अभियान चलाने के लिए अलग-अलग माध्यमों का सहारा लेता है


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