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7th Pay Commission : DA तो बढ़े लेकिन कैसे होगा महंगाई का हिसाब, यहाँ समझें डीए की हर एक पॉइंट

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7th Pay Commission DA Hike : डीए और डीआर की गणना महंगाई के हिसाब से होती है. केंद्रीय कर्मचारियों और सरकारी क्षेत्र के केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गणना की विधि अलग-अलग है. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए तीन महीने का एआईसीपीआई का एवरेज निकाला जाता है जिसमें बेस ईयर 2016 के हिसाब से 100 रखा जाता है.

7th Pay Commission DA Hike : केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए सरकार ने महंगाई भत्ता बढ़ा दिया है. महंगाई भत्ता यानी की डीए (DA) कर्मचारियों के लिए और पेंशनर के लिए महंगाई राहत यानी डीआर (DR) में वृद्धि का ऐलान किया गया है. यह बढ़ोतरी 1 जनवरी 2022 से लागू हो गई है. सरकार ने इसमें 3 फीसदी वृद्धि का ऐलान किया जिसके बाद यह 34 फीसदी पर पहुंच गया है. महंगाई भत्ते की गणना ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (All india consumer price index) के हिसाब से होता है. उपभोक्ता सामानों की जैसी महंगाई रहती है, सरकार उसी के हिसाब से अपने कर्मचारियों को भत्ते देती है. दरअसल यह भत्ता महंगाई के असर को कम करने के लिए दिया जाता है. केंद्र की तरह राज्य सरकारें भी वेतन आयोग की सिफारिशों पर डीए बढ़ाने का निर्णय लेती है.

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आइए डीए को समझने के लिए हम 8 महत्वपूर्ण मुद्दों पर गौर करते हैं. इससे आपको समझने में आसानी होगी कि डीए या डीआर क्या होता है, इसका फायदा कैसे मिलता है और इसकी गणना सरकारें कैसे करती हैं.

 

1-महंगाई भत्ता या DA क्या है :

महंगाई भत्ता या डीए मंथली सैलरी का ही हिस्सा होता है. सरकारें डीए इसलिए देती हैं क्योंकि बाजार की महंगाई के चलते कर्मचारियों को अपनी जिंदगी आसान बनाने में मदद मिले. ऐसा न हो कि महंगाई के चलते कर्मचारियों का रहना-सहना दूभर हो जाए. इसलिए महंगाई के सूचकांक के आधार पर डीए का फैसला होता है.

2-दो बार बढ़ता है डीए :

डीए साल में दो बार बढ़ता है. एक जनवरी में और दूसरा जुलाई में. चूंकि महंगाई के असर को कम करने के लिए डीए दिया जाता है, इसलिए इसकी गणना भी सीपीआई यानी कि कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स से ही होती है. सीपीआई से यह पता चलता है कि किसी सामान की कीमत पहले कितनी थी और बाद में कितनी बढ़ गई.

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3-अलग-अलग होती है डीए की राशि :

डीए में मिलने वाला पैसा कर्मचारियों के लिए अलग-अलग होता है. सभी कर्मचारियों को एक ही रेट से डीए बढ़ता है, लेकिन सैलरी में फर्क आ जाता है. कर्मचारी किस स्थान पर काम करता है, किस विभाग में कार्यरत है और उसकी सीनियरिटी कितनी है, इस आधार पर डीए का पैसा बढ़ता है.

4-डीए पर टैक्स कटता है :

डीए या महंगाई भत्ते में मिलने वाला पैसा पूरी तरह से टैक्सेबल होता है. यह नियम उनके लिए है जो सैलरीड क्लास में आते हैं.

5-पेंशनर के लिए डीआर :

कर्मचारियों को अगर डीए मिलता है तो रिटायर्ड पेंशनर को उसी रूप में डीआर मिलता है. यहां डीआर का अर्थ है महंगाई राहत या डियरनेस रिलीफ. जिस तरह डीए की गणना होती है, वैसी ही गणना डीआर की भी होती है.

6-डीए या डीआर की गणना :

डीए और डीआर की गणना महंगाई के हिसाब से होती है. केंद्रीय कर्मचारियों और सरकारी क्षेत्र के केंद्रीय कर्मचारियों के लिए गणना की विधि अलग-अलग है. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए तीन महीने का एआईसीपीआई का एवरेज निकाला जाता है जिसमें बेस ईयर 2016 के हिसाब से 100 रखा जाता है. केंद्रीय कर्मचारियों के लिए नियम कुछ इस प्रकार है-{ 12 महीनों का ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का औसत ( बेस ईयर-2001=100-115.76/115.76}X100

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सेंट्रल पब्लिक सेक्टर के कर्मचारियों के लिए फॉर्मूला इस तरह है- { 3 महीनों का ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स का औसत ( बेस ईयर-2001=100-126.33/126.33}X100.


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