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PACS Bihar: गांव के पैक्स पर खुलेगा बैंक, बैंकिंग सेवा समेत कई अन्य सुविधाएं मिलेंगी.

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  • बैंकों की तरह पैसे निकालने और जमा करने की.
  • सहकारिता सोसाइटी से जुड़ने से कई स्तर पर होगी मदद.
  • कंप्यूटर एवं इंटरनेट से लैस होने से देश-दुनिया से होगा जुड़ाव.
  • किसानों के लिए कई तरह के ऑनलाइन ट्रेनिंग प्रोग्राम होंगे.

PACS Bihar: राज्य के पैक्स किसानों एवं ग्रामीणों के लिए जल्द ही बैंक की तरह पैसे निकालने और जमा करने के केंद्र समेत अन्य मल्टी सेंटर के तौर पर काम आएंगे। इसके लिए पैक्सों को कंप्यूटरकृत करने की योजना पर तेजी से कवायद शुरू हो गई है। कंप्यूटर से लैस करने के साथ ही इन पैक्सों को संबंधित सहकारिता बैंक, व्यवसायिक गतिविधि केंद्रों और सहकारिता सोसाइटी से जोड़ दिया जायेगा। इससे ग्रामीण इन पैक्सों से बैंक की तरह पैसे की निकासी और जमा भी कर सकेंगे। खाते भी खुलवा सकते हैं। इसके माध्यम से सिर्फ सहकारिता बैंक वाले खाते ही संचालित हो सकेंगे।

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सहकारिता समितियों के माध्यम से कई तरह की गतिविधियों से सीधे तौर पर जुड़ सकेंगे। इंटरनेट की चौबीस घंटे सुविधा होने से यह एक बहुआयामी गतिविधि केंद्र के तौर पर विकसित हो सकेगा। इसके लिए पहले चरण के तहत राज्य के दो हजार चुनिंदा पैक्स को कंप्यूटरकृत करने की योजना है। इसके लिए सभी पैक्सों के लिए एक खास किस्म का सॉफ्टवेयर तैयार किया जा रहा है, जो सहकारिता बैंकों समेत अन्य से सीधे तौर पर इन केंद्रों को जोड़ सके। हाल में केंद्र सरकार के इस मामले को लेकर एक अहम बैठक भी सहकारिता विभाग के अधिकारियों की हुई है।

2024-25 तक सभी पैक्स को कंप्यूटरकृत करने की है योजना : राज्य के सभी पैक्सों को 2024-25 तक कंप्यूटरकृत कर देने की योजना है। इसके लिए प्रति पैक्स तीन लाख 91 हजार का बजट निर्धारित किया गया है। योजना को केंद्र और राज्य सरकार दोनों मिलकर अमलीजामा पहनायेंगे। इसमें केंद्र का 60 फीसदी और राज्य का शेयर 40 फीसदी होगा। पहले चरण में दो हजार चुनिंदा पैक्स ही कंप्यूटरकृत होंगे। राज्य कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अक्टूबर 2022 बाद इसका कार्य शुरू होने की संभावना है और मार्च 2023 तक इसके पूरा होने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। दो हजार पैक्सों का चयन करने के लिए राज्य स्तरीय एक कमेटी बनेगी, जो सभी जिलों में ऐसे पैक्सों का चयन करेगी। दूसरे चरण में बचे हुए सभी पैक्सों को कंप्यूटरीकृत कर दिया जायेगा। इसकी शुरुआत आगामी वित्तीय वर्ष से होगी।

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ऑडिट होना अनिवार्य: PACS Bihar

योजना के तहत सिर्फ उन्हीं पैक्सों का चयन किया जायेगा, जिनका वर्तमान वर्ष तक का ऑडिट हो चुका है। राज्य में पैक्स की संख्या 8436 है, जिसमें 2021 तक आठ हजार का ऑडिट हो चुका है। वर्तमान वर्ष में दो हजार का ऑडिट हो चुका है और शेष का कार्य तेजी से चल रहा है।

पैक्सों को कंप्यूटरीकृत करने के साथ ही इनमें बैंकिंग सुविधा विकसित करने के अलावा इन्हें मल्टी सेंटर के तौर पर तैयार करने की योजना है। केंद्र से इसके मॉड्यूल को फाइनल कर दिया गया है। पहले चरण में चुनिंदा पैक्स में ही इसे किया जाना है।

– वंदना प्रेयसी (सचिव, सहकारिता विभाग, बिहार सरकार)


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