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Bihar News : बीमार अयांश के लिए भिक्षाटन कर रही मां, कहा – ‘यह नहीं बचा तो मैं जी कर क्या करूंगी’.

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अयांश की मां नेहा सिंह ने अपने बच्चे को बचाने के लिए रोहतास जिले के डेहरी ऑन सोन के पटनवा खुर्द में भिक्षाटन किया. उन्होंने कहा कि मेरे पति जेल में बंद हैं. ऐसे वक्त में लोग हमें मंझधार में नहीं छोड़ें.

11 महीने के अयांश (Ayansh) को ऐसी बीमारी है, जिसके इलाज के लिए 16 करोड़ रुपये खर्च होने हैं. बच्चे के इलाज के लिए अमेरिका से इंजेक्शन मंगाया जाना है. इंजेक्शन की कीमत ज्यादा होने से अयांश की मां नेहा सिंह क्राउड फंडिंग से पैसे जुटा रहीं हैं. इसी क्रम में वह रोहतास (Rohtas) जिले के डेहरी ऑन सोन के पटनवा खुर्द स्थित अपने ससुराल पहुंचीं.

नेहा सिंह ने बच्चे को गोद में लेकर पटनवा खुर्द गांव में भिक्षाटन किया. गांव की महिलाओं ने बच्चे के इलाज के लिए यथा संभव मदद की. इस दौरान नेहा ने कहा, ‘मेरे पति जेल में बंद हैं. अगर आयांश नहीं बच पाया तो मैं जी कर क्या करूंगी. एक-एक दिन आयांश के लिए भारी पड़ता जा रहा है. समय कम है.’ बेटे को बचाने की गुहार लगाते हुए नेहा फफक-फफक कर रो पड़ीं. साथ मौजूद महिलाओं ने उन्हें संभाला. इस दौरान नेहा ने आंचल फैलाकर मदद की गुहार लगाई.

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मेरे बेटे के पास अब सिर्फ कुछ महीने ही बचे हैं, जिसके कारण मुझे भिक्षाटन करना पड़ रहा है. लोगों से अपील है कि जिस प्रकार अब तक आपने हमारा सहयोग किया है उसी तरह सपोर्ट बनाए रखें. हमें बीच मंझधार में नहीं छोड़ें.“- नेहा सिंह, आयांश की मां

गांव की एक महिला सरस्वती देवी ने कहा, ‘एक मां पटना से अपने बीमार बच्चे का जीवन बचाने आई है. अयांश सिर्फ नेहा का ही बेटा नहीं है वह बिहार का बेटा है. पूरे देश का बेटा है. हम सभी महिलाएं एक होकर नेहा के साथ हैं. हमलोग बच्चे को बचाकर दम लेंगे.’ बता दें कि अयांश के इलाज के लिए जरूरी लगभग आधा पैसा क्राउड-फंडिंग से जमा हो गया है.

अयांश स्‍पाइनल मस्‍कुलर एट्रोफी (Spinal Muscular Atrophy) नामक दुलर्भ बीमारी से जूझ रहा है. इस बीमारी के साथ जन्म लेने वाले बच्चे अधिक से अधिक 2 साल तक जिंदा रह पाते हैं. ठीक ढंग से ट्रीटमेंट हो जाए तो बच्चे को नया जीवन मिल सकता है. इस बीमारी में बच्चे के शरीर के अंग धीरे-धीरे काम करना बंद कर देते हैं. नेहा सिंह अयांश को लेकर मुख्यमंत्री के जनता दरबार में भी जा चुकी हैं, लेकिन नीतीश कुमार (CM Nitish Kumar) ने कह दिया था कि सरकारी खजाने से बच्चे की मदद करना संभव नहीं है.


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