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Fishing Banned in Bihar: बिहार में 15 अगस्त तक नदियों में मछली पकड़ने पर रोक.

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Fishing Banned in Bihar: बिहार में बुधवार 15 जून से दो महीने तक मछली पकड़ने यानी मछलियों के शिकार पर रोक रहेगी। मछलियों के प्रजनन में सुविधा के लिए यह रोक लगाई गई है। 15 अगस्त तक राज्य की सभी सदाबहार नदियों में मछुआरे मछली नहीं पकड़ सकेंगे। इससे प्रदेश में मछली उत्पादन प्रभावित होगा।

 

Fishing Banned in Bihar: बिहार के उत्तरी हिस्से में लगातार 45 दिनों से मध्य दर्जे की बारिश हो रही है। इसके साथ ही 13 जून को बिहार में मानसून का प्रवेश हुआ है। जिसके बाद दो दिनों तक बारिश की वजह से कोसी नदी बाढ़ की स्थित हो गई है। मौसम विभाग ने 19 जून तक बारिश, वज्रपात और नदियों में बढ़ते जलस्तर को लेकर अलर्ट जारी किया है।

 

मौसम विभाग के चेतावनी के बाद ही बिहार के सभी नदियों में मछली मारने पर 15 जून से 15 अगस्त तक रोक लग गई है। इसके साथ ही जून, जुलाई, अगस्त में मछलियां प्रजनन करती है। जिसको देखते मछली मारने पर रोक लगी है। जिससे मछलियों के उत्पादन प्रभावित नहीं हो। बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम 2006 के तहत हर साल दो महीने के लिए मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। 15 जून से 15 अगस्त तक मछलियां प्रजनन के लिए नदी, तालाब के किनारे पहुंचती है।

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बिहार जलकर प्रबंधन अधिनियम 2006 के तहत हर साल दो महीने मछली पकड़ने पर प्रतिबंध रहता है। 15 जून से 15 अगस्त तक मछलियों का प्रजनन का समय होता है। इस दौरान मछलियां नदियों और तालाबों के किनारे आ जाती हैं। इससे उनका शिकार आसान हो जाता है। वो ही एक किलो मछली एक लाख मछलियों को जन्म देती हैं।

 

अगर प्रजनन के समय मछलियों का शिकार हो जाता है तो इससे जलाशय में उनकी संख्या खत्म होने का खतरा रहता है। आंकड़ों के मुताबिक राज्य में 6.5 लाख मीट्रिक टन मछली का उत्पादन होता है। हालांकि, इसकी खबत साढ़े आठ लाख मीट्रिक टन है। बाकी की मछलियां पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल और आंध्र प्रदेश से आयात की जाती है। फिलहाल दो महीने मछली पकड़ने पर रोक लगने से बाजार में इसकी किल्लत होने की पूरी संभावना है।


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