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Bihar Electricity Department: बिहार में अब मिलेगी 24 घंटे मिलेगी बिजली.

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  1. ● पिछले दिनों राज्य कैबिनेट से मिली थी डीपीआर को मंजूरी
  2. ● केंद्र की ओर से 60 तो बिहार को 40 फीसदी राशि खर्च करना है
  3. ● तकनीकी व व्यावसायिक नुकसान कम होगा
  4. ● राज्य में 24 घंटे बिजली उपलब्ध हो सकेगी
  5. ● बिजली चोरी पर लगाम लगाने में आसानी होगी.

 

Bihar Electricity Department: बिहार की बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण की योजना को केंद्र से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही राज्य में 13 हजार करोड़ से अधिक की परियोजना पर काम शुरू होने का रास्ता साफ हो गया है। तीन वर्षों में पूरी होने वाली इस योजना के बाद बिहार के लोगों को 24 घंटे बिजली मिलने लगेगी। साथ ही सभी किसानों को पटवन के लिए अलग से बिजली भी दी जा सकेगी।

 

देशभर में बिजली व्यवस्था के आधुनिकीकरण के लिए रिवैम्पड डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर स्कीम (आरडीएसएस) लॉन्च की गई है। इसमें देशभर में तीन लाख करोड़ खर्च होने हैं। योजना पर अमल करने के लिए पिछले दिनों केंद्रीय ऊर्जा मंत्री आरके सिंह ने सूबे के ऊर्जा मंत्री बिजेन्द्र प्रसाद यादव के साथ बैठक की थी। उसी बैठक में बिहार ने लगभग 13 हजार करोड़ की परियोजनाओं पर काम करने की जानकारी दी थी। उसी के आलोक में बिजली कंपनी ने डीपीआर बनाई, जिसकी मंजूरी हाल ही में राज्य कैबिनेट से मिली।

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अब उसी डीपीआर को केंद्र ने मंजूर कर लिया, जिसका आधिकारिक पत्र जल्द ही बिजली कंपनी को मिल जाएगा। इसके बाद इन परियोजनाओं पर काम शुरू करने के लिए निविदा प्रक्रिया शुरू होगी। बिजली कंपनी ने 13 हजार 271 करोड़ की परियोजनाओं का प्रस्ताव केंद्र को सौंपा था। इसमें केंद्र सरकार की ओर से 60 फीसदी तो बिहार को 40 फीसदी राशि खर्च करनी है। इसके अनुसार 5309 करोड़ बिहार सरकार खर्च करेगी।

योजना के तहत प्री-पेड बिलिंग सिस्टम और राज्य के छह शहरों में स्काडा (सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डाटा एकोजिशन) सेंटर खुलेंगे। गया, भागलपुर, बिहारशरीफ, मुजफ्फरपुर, पूर्णिया व दरभंगा में खुलने वाले इस स्काडा सेंटर सिस्टम से बिजली वितरण प्रणाली की रियल टाइम मॉनिटरिंग होगी। इस मद में 1204 करोड़ खर्च होंगे जिसमें से राज्य सरकार का हिस्सा 482 करोड़ है। वहीं संचरण-वितरण व्यवस्था और बेहतर करने के लिए जरूरत के अनुसार ग्रिड, सब-स्टेशन, फीडर बनाए जाएंगे।

पावर ट्रांसफॉर्मरों की क्षमता में वृद्धि, अतिरिक्त पावर ट्रांसफॉर्मर लगाए जाएंगे। आवासीय, वाणिज्यिक परिसर व ट्रांसफॉर्मरों में स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाये जाएंगे। घनी आबादी वाले इलाकों में बिजली तारों को कवर किया जाएगा। हर 20 किमी पर एक फीडर बनाने की योजना है जो अभी औसतन 30 किमी की दूरी पर है। इस मद में 5372 करोड़ खर्च होंगे। इसमें राज्य 2149 करोड़ खर्च करेगा।

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किसानों के लिए अलग फीडर: Bihar Electricity Department

हर खेत को पानी उपलब्ध कराने के लिए कृषि फीडर बनाने की योजना पर और तेजी से काम होगा। इस मद में 6695 करोड़ खर्च होंगे। इसमें 2678 करोड़ राज्य सरकार खर्च करेगी।

मुख्य सचिव करेंगे मॉनिटरिंग: Bihar Electricity Department

आरडीएसएस के तहत चयनित परियोजनाओं की मॉनिटरिंग व उसे गति देने के लिए मुख्य सचिव की अध्यक्षता में डिस्ट्रीब्यूशन रिफॉर्म्स कमेटी (डीआरसी) का गठन किया गया है। इसमें कई विभागों के अपर मुख्य सचिव व प्रधान सचिव को शामिल किया गया है। ऊर्जा विभाग के प्रधान सचिव इस समिति के संयोजक हैं। समिति राज्य की बिजली परियोजनाओं की नियमित तौर पर समीक्षा करने के साथ ही उपभोक्ता हित में कार्ययोजना बना कर उसका क्रियान्वयन भी सुनिश्चित करेगी।

बिजली आधुनिकीकरण योजना पर काम करने वाला बिहार पहला राज्य होगा, जिसके प्रस्ताव को केंद्र ने मंजूर कर दिया है। इन योजनाओं से उपभोक्ताओं को और गुणवत्तापूर्ण बिजली मिलेगी।

-बिजेन्द्र प्रसाद यादव, मंत्री, ऊर्जा, योजना एवं विकास विभाग.


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