SBI Customers Alert! क्या आपके भी अकाउंट से कटे हैं 147.50 रुपये? ग्राहकों के लिए जरुरी खबर

SBI Customers Bank Account: दरअसल डेबिट कार्ड वाले एटीएम के लिए एसबीआई बैंक मेंटेनेंस चार्ज काट लेता है। ये शुल्क हर साल बैंक की ओर से बैंक अकाउंट से काट लेता है। एसबीआई बैंक ने ट्विटर हैंडल पर इसकी जानकारी भी दी है और कहा है कि बैंक की ओर से चार्ज के तौर पर 147.50 रुपए काटे जाते हैं।

भारतीय स्टेट बैंक ने अपने सभी खाता धारकों के अकाउंट से 147 रुपए काटे हैं. ज्यादातर SBI खाताधारक 147.50 रुपए डिडक्शन का मैसेज देखकर हैरान हैं. ATM कम डेबिट कार्ड के सालाना शुल्क के तौर पर बैंक ये राशि ले रहा है. इसलिए ग्राहकों को परेशान होने की जरूरत नहीं है. सभी बैंक ग्राहकों से डेबिट कार्ड शुल्क लेते हैं. प्राइवेट बैंकों का शुल्क ज्यादा होता है. हालांकि, बैंकों के ग्राहकों को उनके अधिकारों के बारे में पूरी तरह जानकारी होनी चाहिए. ताकि बैंक आपसे ज्यादा पैसे न वसूल लें. आइए आपको बैंक के ग्राहकों को मिले अधिकारों के बारे में जानकारी देते हैं.

बैंक नहीं कर सकते हैं भेदभाव
बैंक ग्राहकों से लिंग, उम्र, धर्म, जाति और शारीरिक क्षमता के आधार पर प्रोडक्ट्स और सर्विसेज देते हुए भेदभाव नहीं कर सकते हैं. हालांकि, बैंक ग्राहकों को ब्याज या प्रोडक्ट्स के मामले अलग-अलग दरें पेश कर सकते हैं. केंद्रीय बैंक का कहना है कि वित्तीय सेवाएं देने वाले के पास कुछ खास प्रोडक्ट्स हो सकते हैं, जिन्हें किसी समूह को ध्यान में रखकर तैयार किया गया हो.

पारदर्शिता का अधिकार
आपको लगता होगा कि बैंक दस्तावेजों में इस्तेमाल की गई भाषा साधारण और पारदर्शी होनी चाहिए. नियमों के मुताबिक, बैंकों को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी कॉन्ट्रैक्ट्स पारदर्शी हैं और आम आदमी इन्हें आसानी से समझ सकता है. सही तरीके से संवाद करने की जिम्मेदारी बैंकों की होती है. प्रोडक्ट की कीमत, ग्राहकों की जिम्मेदारी और जोखिमों के बारे में साफ जानकारी देना जरूरी होता है.

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प्राइवेसी का अधिकार
बैंकों को ग्राहकों की निजी जानकारी गोपनीय रखनी चाहिए, जब तक कानून या ग्राहक अपनी ओर से किसी तरह की सहमति नहीं देते हैं. ग्राहकों के पास सभी तरह के संचारों से सुरक्षा का अधिकार होता है. बैंक टेलीमार्केटिंग कंपनियों को बेचने के लिए डिटेल्स नहीं दे सकते हैं.

शिकायतों का समाधान
अगर बैंक नियमों का पालन नहीं करता है, तो शिकायतों का समाधान किया जा सकता है. बैंक अपने प्रोडक्ट्स के लिए जिम्मेदार हैं. इसके अलावा थर्ड पार्टी जैसे इंश्योरेंस कंपनियों और फंड हाउस के प्रोडक्ट्स के लिए भी जिम्मेदार हैं. एक बार प्रोडक्ट को बेचने के बाद वे जिम्मेदारी से पीछा नहीं छुड़ा सकते हैं.

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